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Shimla: दुष्कर्म के दोषी की सजा निलंबित करने की याचिका हाईकोर्ट में खारिज, 12 साल तक रहा फरार

Wed, 08 Jul 2026 06:07 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने दुष्कर्म और आपराधिक धमकी के मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति की सजा को निलंबित करने की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। 
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हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। - फोटो : अमर उजाला
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने दुष्कर्म और आपराधिक धमकी के मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति की सजा को निलंबित करने की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि मुकदमे के दौरान 12 साल तक फरार रहने वाले और कानून की प्रक्रिया से बचने वाले अपराधी को ऐसी राहत नहीं दी जा सकती। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि कम अवधि की सजा वाले मामलों में सजा का निलंबन एक सामान्य नियम हो सकता है, लेकिन दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराधों में दोषी ठहराए जाने के बाद सजा को निलंबित करना अपवाद होना चाहिए न कि नियम। अदालत ने यह आदेश प्रीत सिंह की अर्जी पर सुनवाई के बाद जारी किया।

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यह मामला वर्ष 2006 में पुलिस थाना रोहड़ू जिला शिमला में दर्ज एफआईआर से संबंधित है। फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट शिमला ने 17 फरवरी 2025 को आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत 10 साल के कठोर कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। साथ ही उसे धारा 506 के तहत आपराधिक धमकी को देने के लिए दो साल के साधारण कारावास की सजा भी सुनाई गई थी। दोषी ने इस सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर कर सजा को निलंबित करने की मांग की थी। राज्य सरकार ने याचिका का कड़ा विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि घटना के तुरंत बाद पीड़ित महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद आरोपी को 24 मार्च 2006 को गिरफ्तार कर लिया गया था। पुलिस हिरासत के दौरान वह चकमा देकर भाग गया। आरोपी अगले 12 वर्षों तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर रहा और उसे 27 फरवरी 2018 को दोबारा गिरफ्तार किया जा सका।
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