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प्रबोधन कार्यक्रम: कुलदीप पठानिया बोले- आजादी के बाद सिर्फ चौदह निजी सदस्य बिलों को मंजूरी

Sat, 04 Jul 2026 05:28 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

कोलकाता में आयोजित दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए। 
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विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया प्रबोधन कार्यक्रम में महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल विधानसभा के नव निर्वाचित सदस्यों के लिए कोलकाता में आयोजित दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने महत्वपूर्ण आंकड़े साझा किए। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से संसद में सिर्फ चौदह निजी सदस्य बिलों को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली है। वर्ष 1970 के बाद से कोई भी ऐसा बिल दोनों सदनों में पारित नहीं हुआ है। यह कार्यक्रम 3 और 4 जुलाई को न्यू टाउन कन्वेंशन सेंटर और असेंबली हाउस कोलकाता में आयोजित किया गया था। इसका आयोजन पश्चिम बंगाल विधानसभा और लोक सभा सचिवालय के संसदीय लोकतंत्र शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान (प्राइड) ने किया। पठानिया ने कहा कि 17वीं लोक सभा में 729 निजी सदस्य बिल पेश किए गए, जिनमें से केवल दो पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि विधायी कार्यों के साथ गैर सरकारी सदस्य बिल पर विषय पर अपने अनुभव साझा किए। लोक सभा सदस्य एनके प्रेमचंद्रन और राज्य सभा सचिवालय के पूर्व संयुक्त सचिव प्रदीप चतुर्वेदी ने भी सत्र को संबोधित किया।

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पठानिया ने स्पष्ट किया कि निजी सदस्य वह होता है जो मंत्री नहीं होता। ऐसे सदस्यों की ओर से पेश किए गए बिलों को निजी बिल कहा जाता है। उन्होंने कहा कि इन बिलों का महत्व केवल कानून बनने में नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाने और जनमत बनाने में है। कई सुधारों की शुरुआत निजी सदस्य बिलों के रूप में हुई थी। उनकी सफलता को सार्वजनिक नीति को प्रभावित करने की क्षमता से मापा जाना चाहिए। पठानिया ने नए सदस्यों से सांविधानिक कार्य में हिस्सा लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि हर बिल शासन व्यवस्था को बेहतर बनाने का अवसर देता है। विधायक की असली विरासत कानूनों की गुणवत्ता और लोकतांत्रिक संस्थाओं में योगदान से मापी जाती है। उन्होंने सभी सदस्यों के सफल और शानदार विधायी कॅरिअर की कामना की। कार्यक्रम के सत्र के उपरांत, पीठासीन अधिकारियों की समिति ने अपनी बैठक में प्रारूप प्रतिवेदन को अंतिम रूप दिया और लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला को भेंट किया।
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