प्रदेश में बीपीएल चयन की प्रक्रिया सवालों के घेरे में है। ग्रामसभा में चयन के बावजूद बीपीएल परिवारों का चयन सही ढंग से नहीं हो पाता। अब राज्य सरकार प्रदेश में बीपीएल चयन प्रक्रिया में बदलाव करने जा रही है। इसमें केरल की कुंडमश्री परियोजना के अनुभवों का फायदा उठाने की कवायद जारी है। इस प्रक्रिया की शुरुआत मंडी जिले से की जा रही है।
केरल राज्य में बीपीएल चयन और लोगों के आर्थिक विकास की दिशा में राष्ट्रीय आजीविका मिशन के माध्यम से सराहनीय कार्य हुआ है। इसे आधार मानते हुए प्रदेश में केरल के अनुभवों को लागू किया जा रहा है। इस योजना के तहत केरल से स्वयंसेवियों का दल एक माह के लिए मंडी जिले की विभिन्न पंचायतों का दौरा करेगा।
यह दल स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं और पंचायतीराज प्रतिनिधियों के साथ मिलकर डोर टू डोर सर्वे करके बीपीएल परिवारों का चयन करेगा। एक माह बाद फिर इस प्रक्रिया को दोहराने के बाद ग्रामसभा में यह रिपोर्ट पेश की जाएगी। ग्रामसभा की मंजूरी के बाद बीपीएल परिवारों के चयन पर मुहर लगेगी।
नई चयन प्रक्रिया के आधार पर बीपीएल चयन के लिए परिवार की कम से कम आमदनी 50 हजार रुपये सालाना रहेगी। केरल पैट्रन के अनुसार बीपीएल परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए आजीविका मिशन के तहत सौ दिन का रोजगार उपलब्ध करवाया जाएगा।
इसके अलावा महिला स्वयं सहायता समूहों को सात प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण मिलेगा। राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत यह ब्याज दर चार प्रतिशत रहेगी। शेष राशि की अदायगी सरकार करेगी।
ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री अनिल शर्मा ने बताया कि,"ग्रामसभा के माध्यम से बीपीएल चयन प्रक्रिया को लेकर शिकायतें मिल रही हैं। इसके चलते अब केरल के अनुभवों का फायदा लिया जा रहा है। इस दिशा में केरल की कुंडमश्री परियोजना की मदद ली जा रही है। इसके लिए केरल का दल हिमाचल में आकर बीपीएल चयन प्रक्रिया में मदद करेगा। हिमाचल से भी लोग प्रशिक्षण के लिए केरल भेजे जाएंगे।"