डॉ. पठानिया ने बताया कि नाबार्ड और सहकारी समितियों के पंजीयक कार्यालय के संयुक्त प्रयासों से प्रदेश की 1113 प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (पैक्स) अब ई-पैक्स के रूप में कार्य कर रही हैं। इससे ऋण वितरण और अन्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा किसानों को तेज और बेहतर सेवाएं उपलब्ध होंगी। ग्रामीण विकास योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन को मजबूत बनाने के लिए नाबार्ड ने बिलासपुर जिले में नया जिला विकास प्रबंधक कार्यालय भी शुरू किया है। इससे जिला प्रशासन, बैंकों और अन्य हितधारकों के साथ समन्वय बेहतर होगा तथा विकास योजनाओं के प्रभावी संचालन में मदद मिलेगी।
डॉ. विवेक पठानिया ने कहा कि नाबार्ड आने वाले वर्षों में ग्रामीण ऋण व्यवस्था को और मजबूत बनाने, सहकारी संस्थाओं के आधुनिकीकरण, जलवायु-अनुकूल एवं आपदा-सहनीय आधारभूत संरचना के वित्तपोषण, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और ग्रामीण आजीविका के स्थायी अवसर सृजित करने पर विशेष फोकस रखेगा। स्थापना दिवस समारोह में नाबार्ड ने अपनी आगामी योजनाओं का भी खुलासा किया। संस्था अब जीआई टैग प्राप्त चंबा चप्पल की मूल्य शृंखला को मजबूत करने और उसकी बाजार पहुंच बढ़ाने पर विशेष ध्यान देगी। ग्रामीण आधारभूत संरचना विकास निधि (आरआईडीएफ) के तहत वर्ष 2025-26 में 783 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है।
इनमें 50 पुलों और पांच सड़कों का निर्माण शामिल है। इन परियोजनाओं से विशेष रूप से दुर्गम और पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की बाजारों, स्कूलों, अस्पतालों और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच बेहतर होगी। नाबार्ड ने प्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग आधारभूत ढांचे के विस्तार का भी निर्णय लिया है। पहले 53 स्थानों पर प्रस्तावित यह परियोजना अब बढ़ाकर 80 स्थानों तक कर दी गई है। इससे राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। नाबार्ड ने हिमाचल की पारंपरिक कला और शिल्प को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संस्था के सहयोग से रणसिंघा, हिमाचली गलीचा और हिमाचल वुड क्राफ्ट को भौगोलिक संकेतक (जीआई) पंजीकरण प्राप्त हुआ है। इससे इन उत्पादों की विशिष्ट पहचान सुरक्षित होगी और कारीगरों को बेहतर आर्थिक लाभ मिल सकेगा।