भाषा, कला और संस्कृति विभाग का जिम्मा संभाल रहे उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि हिमाचल की सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण पर प्रदेश सरकार की ओर से लगभग 550 करोड़ रुपये व्यय किए जा रहे हैं। पारंपरिक पूजा पद्धति में गुणवत्ता लाने और मंदिरों को डिजिटल प्रणाली से जोड़कर व्यवस्थित बनाया जाएगा। पूजा विधि एवं मंत्रोच्चारण में शुद्धता लाने के लिए 5 से 25 फरवरी 2025 तक श्री चिंतपूर्णी मंदिर के 15 तथा माता श्रीनैना देवी मंदिर के 10 पुजारियों को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्कृत संकाय में ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया गया है। भविष्य में अन्य मंदिर न्यासों के पुजारियों को भी चरणबद्ध तरीके से यह प्रशिक्षण दिया जाएगा।
सरकार यह भी सुनिश्चित कर रही है कि समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित और प्रसारित किया जाए। इसके लिए सांस्कृतिक उत्सवों, डिजिटल प्लेटफार्मों, दस्तावेजीकरण, प्रदर्शनियों से हिमाचल की लोक कलाओं, पारंपरिक संगीत, शिल्प और रीति-रिवाजों को साझा किया जाएगा। इससे न केवल राज्य की सांस्कृतिक पहचान को नया आयाम मिलेगा, बल्कि युवाओं में अपनी परंपराओं के प्रति गर्व और जुड़ाव की भावना भी प्रबल होगी। यह साझा सांस्कृतिक संवाद देश की एकता और विविधता में अद्वितीय योगदान देगा।