दुश्मनों से लोहा लेते हुए जिस वीर सैनिक की मौत हो गई थी, छह साल बाद उसका जांबाज बेटा भी देश के लिए कुर्बान हो गया। संयोग की बात यह है कि पिता भी आसाम राइफल में था और बेटा भी।
हिमाचल प्रदेश के मंडी में कोट हटली के दरकोहल गांव के बीर सुपूत राजीव कुमार की मौत से पूरा गांव शोक में डूब गया है। गत रोज सीमा पर गश्त के दौरान माइन फटने से उसकी जान चली गई। राजीव कुमार की अभी शादी भी नहीं हुई थी।
राजीव कुमार (26) मिजोरम में तैनात था। गत रोज अन्य सैनिकों के साथ गश्त पर था। इस बीच माइन फटने से उसकी मौत हो गई। बताया जा रहा है राजीव कुमार की दस दिसंबर को शादी थी। लेकिन शायद किस्मत को यह मंजूर न था। सीमा की रक्षा करते हुए उसकी जान चली गई।
राजीव कुमार के पिता स्व. देवराज भी आसाम राइफल में देश की सेवा करते हुए छह वर्ष पूर्व दुश्मनों की गोलियों से शहीद हो गए थे। अब जांबाज बेटा देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गया। राजीव तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ा था। उसका छोटा भाई तथा बहन अभी स्कूल में ही पढ़ते हैं।
इधर, उपमंडलाधिकारी सरकाघाट रोहित राठौर ने बताया कि शहीद राजीव कुमार की पूरे सैनिक सम्मान के साथ अंत्येष्टि होगी। प्रशासन की ओर से भी श्रद्धांजलि दी जाएगी। शहीद सैनिक के पार्थिव शरीर के शाम तक पैतृक गांव पहुंचने की उम्मीद है।
उधर, विधायक कर्नल इंद्र सिंह, दलीप ठाकुर, राजेंद्र भुट्टो, राम लाल कौशल, अमरनाथ, योगराज, हंसराज, पूर्व मंत्री रंगीला राम राव, अनिल शर्मा, सचिन वर्मा, लता ठाकुर, विजयलक्ष्मी, प्रमीला ठाकुर ने इस घटना पर गहरा शोक प्रकट करते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है।