राज्य स्तरीय युवा उत्सव में नाटक प्रस्तुत करते कांगड़ा के कलाकार।
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मंडी। छोटी काशी में खेल विभाग के 33वें राज्यस्तरीय युवा उत्सव में प्रदेशभर के युवा रंगकर्मियों ने अपनी अभिनय प्रतिभा की छाप छोड़ी। वहीं सामाजिक कुरीतियों, व्यवस्था के दोगलेपन, अंधविश्वास, सम सामयिक घटनाक्रमों और आतंकवाद जैसे ज्वलंत मुद्दों को नाटकों के माध्यम से उठाकर यह संदेश दिया कि आज का युवा अपने आसपास की समस्याओं के प्रति न केवल जागरूक है बल्कि उनके समाधान की दिशा में भी प्रयासरत है। युवा उत्सव के दौरान शिमला, मंडी, कुल्लू, सिरमौर, हमीरपुर, सोलन, कांगड़ा, बिलासपुर, चंबा आदि जिलों के युवा रंगकर्मियों ने अपने बेमिसाल अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया।
एक दूसरे को भी कड़ी टक्कर दी। विशेषकर मंडी जिला का डायन और सिरमौर का सुबह तो होने दो, इस युवा उत्सव की बेहतरीन प्रस्तुतियां रहीं। मंडी जिला के डायन नाटक में समाज के ठेकेदारों द्वारा एक महिला को डायन करार देकर उसका जीवन नर्क बना देने की दास्तां है। जब वही डायन सैकड़ों लोगों की जान बचाने के लिए ट्रेन के आगे कूद कर आत्महत्या कर देती है तो उसे देवी के रूप में पूजा जाता है। वहीं सिरमौर जिला की प्रस्तुति इस्लामिक आतंकवाद की सच्चाई को उजागर करती है।
कौम के नाम पर आईएस, अलकायदा, हिजबुल मुजाहिदीन और सिमी जैसे आतंकी संगठनों की हकीकत को बयां करता यह नाटक बेहद प्रभावशाली रहा। विशेषकर कलाकारों की अदाकारी ने दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि आतंक का कोई मजहब नहीं होता है। यह तो बस ब्रेन वाश है जो जन्नत का सपना दिखाकर युवाओं का किया जा रहा है। जबकि हमीरपुर का वार्ड नंबर छह रूसी साम्यवादी शासन की कट्टरता को दर्शाता है। जिसमें अनेक बुद्धिजीवियों को पागल खाने में कैद कर उन्हें इलेक्ट्रिक शॉक देकर प्रताड़ित किया जाता है और उनका पक्ष लेने वाली डाक्टर का भी वही हश्र किया जाता है। इसके अलावा कुल्लू जिला के जिजीविशा नाटक में रोहतांग दर्रे के उस पार की जिंदगी और नेपाली मजदूरों की मार्मिक दास्तां को नाटक में बयां किया गया। सोलन के गुड़ का हलवा, चंबा का एक नाटक ऐसा भी, शिमला का आखिर कब तक अपने-अपने स्तर पर प्रभावी प्रस्तुतियां रहीं। इससे उम्मीद जगती है कि हिमाचल में रंगमंच का भविष्य बेहतर है।