नाचन हल्के के चैड़ा शमशानघाट में शहीद राकेश कुमार की पार्थिव देह के अंतिम संस्कार में सैन्य सम
मंडी। नेक व्यवहार के साथ खुशमिजाज नायब सूबेदार राकेश कुमार के साहस के चर्चे गांव में भी अकसर लोगों की जुबान पर रहे हैं। छुट्टी न मिलने पर अकसर बलिदानी की पत्नी भानु प्रिया अपने लाडले बेटे प्रणव को लोरियां सुनाती थी कि तिरंगे की आन-बान और शान के लिए ही तुम्हारे पापा बने हैं। उसी तिरंगे की हिफाजत के लिए राकेश कुमार ने अपनी जान की बाजी लगाई और उनके 9 साल के बेटे ने तिरंगे को ही सीने से लगाकर पिता कोे अंतिम विदाई दी।
बेटे ने पिता की वीरता पर उन्हें सैल्यूट किया। बलिदानी की विरांगना भानुप्रिया ने भी तिरंगे को सीने में लगाकर अपने सुहाग को अंतिम विदाई दी। देश की रक्षा के लिए पहाड़ के वीरों की वीरता के किस्से आज भी कई माताएं अपने बच्चों को लोरी की तरह सुनाती हैं। ऐसी ही लोरी भानुप्रिया अपने बेटे को सुनाकर देश सेवा के लिए प्रेरित करती आई हैं। बलिदानी के बड़े भाई कर्म सिंह बताते हैं कि राकेश का भी यही सपना रहा है कि उनका बेटा भी आर्मी ज्वाइन कर देश की सेवा करे। आपदा में मकान के क्षतिग्रस्त होने पर बलिदानी राकेश और भानू प्रिया ने नए साल में कई सपने बुने थे, लेकिन उनकी शहादत ने उन सभी सपनों को पलभर में बिखेर दिया।
बड़े भाई से कहा था, पहले आप बनाओ घर
2023 में आई आपदा ने बलिदानी राकेश के घर को क्षतिग्रस्त कर दिया था। इसके बाद परिवार किराये के घर में रह रहा था। मंगलवार को उनके बड़े भाई कर्म सिंह ने बताया कि वह और छोटा भाई का परिवार एक साथ रहते हैं। घर क्षतिग्रस्त होने के बाद दो माह पहले घर आया बलिदानी राकेश यहीं कहकर गया था कि भाई आप दिसंबर तक घर बना लो, पैसे की चिंता न करना। इसके बाद मैं अपना घर बनाऊंगा। बताया कि जब वह डेढ़ वर्ष का था, तब पिता की मौत हो गई थी। अकसर उसे नया घर बनाने की चिंता लगी रहती थी।
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