गाड़ागुशैण में वन अधिकार जागरूकता शिविर में मौजूद लोग। स्त्रोत- संगठन
थुनाग (मंडी)। सराज क्षेत्र के गाड़ागुशैण स्थित पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में मंगलवार को वन अधिकार अधिनियम-2006 पर कार्यशाला करवाई गई। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने कानून को आम आदमी की भाषा में समझाया। कार्यशाला में थाचाधार, जुफरकोट, घाट और खौली पंचायतों की 12 वन अधिकार समितियों के सदस्यों ने हिस्सा लिया। मुख्य संसाधन व्यक्ति संदीप मिन्हास (पीपुल्स फॉर हिमालयन डेवलपमेंट) ने कहा कि यह कानून जंगल में रहने वाले हमारे लोगों का है।
सदियों से हम जंगल से चारा, लकड़ी, घास लेते आए हैं। अब एफआरए कहता है कि जिस जमीन पर तुम खेती करते हो, उस पर तुम्हारा हक है। बताया कि दावा कैसे भरें, कागजात कैसे तैयार करें और पटवारी-वन विभाग से कैसे काम लें। वहीं, पूर्व जिला स्तरीय समिति सदस्य संतराम ने ग्रामीणों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि पहले वन विभाग हमें अतिक्रमी कहता था, अब कानून कहता है कि जंगल तुम्हारा भी है। तीन पीढ़ी से रह रहे हो तो हक तुम्हारा। हम ग्राम सभा को इतना मजबूत बना रहे हैं कि कोई अफसर दावा खारिज नहीं कर पाएगा। यह कानून सिर्फ कागज नहीं, हमारी जिंदगी और सम्मान का सवाल है। संवाद