मंडी। नगर निगम मंडी की रीढ़ इंजीनियरिंग ब्रांच भी धीरे-धीरे खाली हो रही है। वार्डों में विकास कार्यों का जिम्मा अब आउटसोर्स पर तैनात सहायक अभियंता और दो कनिष्ठ अभियंता के जिम्मे पर है। इनमें एक कनिष्ठ अभियंता छुट्टी पर चल रहे हैं। ऐसे में 15 वार्डों वाले नगर निगम में कार्यों का रखरखाव और निगरानी का जिम्मा सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता पर है।
मंगलवार को निगम में तैनात एकमात्र सुपरवाइजर सुरेश कुमार का तबादला धर्मशाला हो गया। पिछले चार महीनों में अधिशासी अभियंता और सहायक अभियंता का भी तबादला हो चुका है। हाल में आउटसोर्स पर तैनात एक कनिष्ठ अभियंता भी सेवाएं संपन्न कर चुका है। इंजीनियरिंग ब्रांच के खाली होने से निगम के कई कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
नए कार्यों के एस्टीमेट तक नहीं बन रहे हैं, जबकि फाइलों का ढेर रोजाना बढ़ रहा है। स्टाफ न होने के कारण विकास कार्यों की निगरानी करना नगर निगम के लिए चुनौती बनता जा रहा है। इसके अलावा एमसी में एग्जीक्यूटिव का एक, सुपरिंटेंडेंट ग्रेड-2 के दो, असिस्टेंट इंजीनियर का एक, टाउन प्लानर, हेल्थ ऑफिसर, प्लानिंग ऑफिसर और और लॉ ऑफिसर का एक-एक पद खाली है। महापौर वीरेंद्र भट्ट शर्मा स्टाफ को लेकर अपनी बात संबंधित विभाग के मंत्री से उठा चुके हैं।
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नगर निगम में इंजीनियरिंग विभाग के काम
सड़क, पुल, जल आपूर्ति, सीवरेज, जल निकासी, पार्क और इमारतों जैसी परियोजनाओं का डिजाइन, निर्माण, रखरखाव में मदद करना। जल निकासी सुविधाओं का सुधार करना, निर्माण और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को सुरक्षित करना इंजीनियरिंग विभाग का काम होता है। इसके अलावा स्थानीय कोड और विनियमों का पालन करना, निर्माण परमिट अनुरोधों की समीक्षा करना, साइट का दौरा करके यह सुनिश्चित करना कि डेवलपर की योजनाएं और प्रोटोटाइप सही हैं, भूमि सर्वेक्षण करना आदि उनके कार्य में शामिल रहता है।
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नगर निगम कार्यालय में स्टाफ की कमी का मुद्दा मुख्यमंत्री और मंत्री विक्रमादित्य के ध्यान में लाया गया है। उन्होंने स्टाफ भरने का आश्वासन दिया है। इंजीनियरिंग ब्रांच में स्टाफ कम होने से नए कार्यों को अमलीजामा पहनाने में परेशानी आ रही है।
-वीरेंद्र भट्ट शर्मा, महापौर, नगर निगम मंडी
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