कमरुनाग में हुई बर्फबारी से जमी पवित्र झील। स्त्रोत- जागरूक पाठक
गोहर (मंडी)। जिले के कमरुनाग धार्मिक स्थल में चांदी की चादर बिछ गई है। इससे कमरुनाग की पवित्र झील जम गई है। करीब चार माह बाद इंद्र देवता मेहरबान हुए हैं। पहाड़ों में बर्फबारी होने से किसानों, बागवानों, पर्यटकों समेत देव समाज के लोगों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है।
प्रशासन ने कमरुनाग और शिकारी देवी मंदिरों के कपाट बंद कर दिए हैं। मंदिर परिसर से दुकानदारों समेत अन्य लोगों को सुरक्षित जगह जाने के आदेश दिए हैं। सेब बगीचों के लिए इस समय बारिश और बर्फबारी की बेहद जरूरत है। हल्की बारिश और बर्फबारी के बाद किसान, बागवान और अधिक बारिश-बर्फबारी की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
किसानों उत्तम चंद, राजीव ठाकुर, मुरारी लाल, दीपक, यशवंत, चंद्रमणि आदि ने बताया कि बारिश और बर्फबारी फसलों के लिए लाभदायक है। बागवानी विशेषज्ञ डॉ. चिंत राम ठाकुर ने बताया कि बर्फबारी और बारिश सेब पौधों के लिए रामबाण है।
उधर, लोक निर्माण विभाग, विद्युत और जल शक्ति विभाग ने बर्फबारी से निपटने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। सभी महकमों के उच्चाधिकारियों ने कनिष्ठ अधिकारियों को बर्फबारी से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। देव कमरुनाग के गूर देवी सिंह ने बर्फबारी होने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि बर्फबारी होने से देवता की पवित्र झील जम गई है।
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कमरुनाग में हुई बर्फबारी से जमी पवित्र झील। स्त्रोत- जागरूक पाठक