थुनाग (मंडी)। आपदा में बहुत कुछ खो चुके रूशाड़ा गांव के लिए वीरवार को जब सड़क का पुनर्निर्माण शुरू हुआ तो प्रभावितों की आंखें चमक उठीं। ग्रामीणों ने प्रसाद बांटकर खुशी मनाई। आपदा के 23 दिन बाद भी गांव में जनजीवन पटरी पर नहीं लौट पाया है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि आपदा में क्षतिग्रस्त सड़क के पुनर्निर्माण से गांव में विकास की शुरुआत हो सकेगी।
30 जून की आपदा ने गांव को भारी नुकसान पहुंचाया था। मुख्य सड़क से गांव को जोड़ने वाली तीन किलोमीटर लंबी सड़क पूरी तरह बह गई थी। इससे गांव का संपर्क दुनिया से कट गया था। ग्रामीणों ने सरकार से एकमात्र सड़क के पुनर्निर्माण की मांग रखी थी। आपदा ने गांव को मलबे में दफन कर दिया था। ग्रामीणों की आंखों में आंसू थे, मगर दिलों में एक ही पुकार थी हमें राशन नहीं, सड़क चाहिए।
स्थानीय बोध राज, केवल कृष्ण, ओम प्रकाश, सावित्री देवी, गंगा और रेसमू ने कहा कि राशन तो है, लेकिन सड़क के बिना जीवन प्रभावित हो रहा है। विद्यार्थी दिनेश, गोलू, मोनू, डिंपल और सोनू ने कहा कि बिना सड़क के स्कूल जाना मुश्किल हो रहा है। इंद्र सिंह, दलवीर और गोकुल चंद के घर, जमीन और सपने आपदा में बह गए। वे खुले आसमान तले रातें काट रहे हैं। प्रशासन की मदद नाकाफी रही। प्रधान नरेश ठाकुर ने एक प्रभावित को चार बिस्वा जमीन देने का वादा किया है। अब सड़क का काम शुरू होने पर ग्रामीणों ने सरकार और मुख्यमंत्री सुक्खू का आभार जताया। संवाद