जंगली जानवरों समेत लावारिस पशु किसानों की फसलों को चट कर रहे हैं। वहीं, अब सूखे की मार से फसल बीमारी की चपेट में आ गई है। किसान चिंता राम, काहन सिंह, विनोद कुमार, वीरी सिंह, हेमराज, प्रकाश चंद, बालक राम, सीता राम, बरफू राम, विपिन कुमार, राजमल, राजकुमार का कहना है कि बार-बार हो रहे नुकसान के कारण किसानों ने अब खेतीबाड़ी से अपने हाथ पीछे हटाना शुरू कर दिए हैं।
उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग उठाई है कि बागवानों की तरह किसानों की खेती का भी बीमा होना चाहिए। इस संबंध में कृषि विभाग धर्मपुर में कार्यरत विषयवाद विशेषज्ञ डा. एसआर पंत ने गंदगी फसल पीला रतुआ की चपेट में आने की बात को स्वीकारा है।
उन्होंने कहा कि जहां से भी बीमारी की शिकायत मिल रही है। वहां गठित टीम दौरा करने के लिए जा रही है। उन्होंने बताया कि 30 मिली दवाई प्रापीकोनाजोल 30 लीटर पानी में अच्छी तरह से घोल करके एक कनाल क्षेत्रफल में स्प्रे करें। रोग के प्रकोप व फैलाव को देखते हुए दूसरा स्प्रे 15 दिन बाद अवश्य करें और छिड़काव दोपहर बाद करें।
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टिहरा में टीम ने किया दौरा
टिहरा क्षेत्र में गेहूं की फसल को पीला रतुआ रोग लगने पर कृषि उप परियोजना निदेशक पवन कुमार, विषयवाद विशेषज्ञ एसआर पंत, जय कुमार और कृषक मित्र रीना देवी ने उपमंडल की बसंतपुर, सज्याओपिपलु पंचयात के चस्वाल, खैैलग तथा वैरी क्षेत्रों का दौरा किया। टीम ने किसानों के साथ खेतों में जाकर फसल का निरीक्षण किया और किसानों को उपाय बताए।