जोगिंद्रनगर (मंडी)। उपमंडल जोगिंद्रनगर में जल शक्ति विभाग की ओर से स्थापित डिजिटल पेयजल सेंसर प्लेटफार्म बंद होते ही अब पानी की गुणवत्ता का पता नहीं चल पा रहा है।
शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की गुणवत्ता पर उपभोक्ताओं के संशय को मिटाने के लिए जल शक्ति विभाग ने डिजिटल तकनीक का सहारा लेकर सार्वजनिक स्थानों में सेंसर युक्त पेयजल प्लेटफार्म लगाए। मिनी सचिवालय के समीप भी पेयजल सेंसर प्लेटफार्म लगाया गया था। इसमें उपभोक्ताओं को पानी की गुणवत्ता का सही पता चल रहा था। मिनी सचिवालय के समीप सेंसर युक्त पेयजल प्लेटफार्म जून 2024 में स्थापित किया था। इसका संचालन सही ढंग से नहीं हो पा रहा है।
बीते मानसून सीजन में लोग जलजनित रोगों की चपेट में आए थे। इस दौरान जल शक्ति विभाग ने शहरी क्षेत्र में स्थापित वाटर कूलरों के कनेक्शन काट दिए थे। साथ ही डिजिटल पेयजल सेंसर प्लेटफार्म को भी इस्तेमाल में लाना बंद कर दिया था। अब करीब तीन माह से पेयजल सेंसर प्लेटफार्म बंद पड़ा हुआ है। इस कारण पानी की गुणवत्ता को लेकर भी उपभोक्ता आशंकित हैं। इधर, नगर परिषद जोगिंद्रनगर के रामलीला मैदान के अलावा चौंतड़ा और लडभड़ोल क्षेत्र में भी डिजिटल पेयजल प्लेटफार्म स्थापित करने की योजना भी ठप है।
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उपमंडल की पंचायतों में पानी की आपूर्ति के लिए स्रोतों से हर रोज सैंपल एकत्रित कर जांच की जा रही है। जल भंडारण टैंकों में पानी की गुणवत्ता की जांच के साथ फिल्टर बेड के माध्यम से भी पानी की शुद्धता की परख होती है। जल्द डिजिटल पेयजल सेंसर युक्त प्लेटफार्म से भी पानी की शुद्धता की जांच शुरू होगी।
-प्यार चंद, अधिशासी अभियंता, जल शक्ति विभाग