जोगिंद्रनगर (मंडी)। मानसून सीजन में उल्टी-दस्त व सांस की बीमारी से संक्रमित मरीजों को क्षेत्र के सरकारी अस्पतालों में दवा व इंजेक्शन का संकट गहरा गया है। रोगी वार्डों में उपचाराधीन मरीजों को निजी दुकानों से दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं।
आपातकालीन, महिला व पुरुष रोगी वार्डों में प्रतिदिन उपचाराधीन 30- 35 मरीजों को आपात समय में ही अस्पताल की डिस्पेंसरी से निशुल्क दवा व इंजेक्शन का लाभ मिल रहा है। इनमें शामिल मध्य वर्गीय परिवार से संबंधित मरीजों को अस्पताल का नर्सिंग स्टाफ दवा व इंजेक्शन उपलब्ध करवाने का प्रयास कर रहा है। अस्पताल में मांगानुसार दवाइयों की आपूर्ति न होने से मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
डीएनएस और एनएस के अलावा दर्द निवारक इंजेक्शन की किल्लत अस्पताल में बनी हुई है। अस्पताल की इस अव्यवस्था पर मरीजों के तीमारदारों में आक्रोश पनपना शुरू हो गया है। गौरतलब है कि उपमंडल के तीन बड़े अस्पतालों जोगिंद्रनगर, लडभड़ोल और सामुदायिक अस्पताल चौंतड़ा में रोजाना 400 से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं।
उन्हें विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के बाद अब स्वास्थ्य विभाग से मिलने वाली निशुल्क दवाओं से महरूम होना पड़ रहा है। शनिवार को नागरिक अस्पताल जोगिंद्रनगर के आपातकालीन वार्ड में दाखिल मरीज बीरी सिंह, आशू देवी, धर्मी देवी, सुषमा, सकीना आदि को उल्टी- दस्त, कमजोरी व चक्कर आने की शिकायत पर उपचार के लिए दाखिल करना पड़ा।
इसी तरह महिला और पुरुष रोगी वार्डों में भी सुबह से रात तक 30 से अधिक मरीज उपचार के लिए दाखिल हुए हैं। इनमें अधिकांश मरीजों को अस्पताल की डिस्पेंसरी से चिकित्सकों की ओर से लिखी गई दवा और इंजेक्शन उपलब्धता के लिए परेशान होना पड़ा।