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Mandi News: वाहनों ने घेरा खेल मैदान, बच्चों के हिस्से आईं तंग गलियां

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खेल मैदान बने पार्किंग स्थल,
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दोपहिया और चौपहिया वाहनों के दबाब से अब गली चौराहे भी नहीं अछूते
राहगीरों और स्थानीय लोगों को गुजरने में आ रही परेशानी
देर-सवेर मरीजों को अस्पताल पहुंचाना हुआ मुश्किल

ग्राउंड रिपोर्ट...
संवाद न्यूज एजेंसी

मंडी। शहर में लगातार बढ़ रहे वाहनों के दबाव और पार्किंग की समुचित व्यवस्था के अभाव ने स्थानीय लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। दोपहिया और चौपहिया वाहन गली-चौराहों और खाली मैदानों में बेतरतीब ढंग से पार्क किए जा रहे हैं। इसका सबसे अधिक असर बच्चों पर पड़ रहा है, जिन्हें खेलने के लिए सुरक्षित स्थान नहीं मिल रहा। अब वे मजबूरी में तंग गलियों और चौराहों पर खेल रहे हैं।
शहर के अधिकांश वार्डों में जिन स्थानों पर कभी बच्चे क्रिकेट, फुटबाल और अन्य खेल खेलते थे, वहां अब दिन-रात वाहन खड़े रहते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों के लिए पड्डल मैदान के अलावा कोई खुला खेल मैदान नहीं बचा है। सड़कों और गलियों के दोनों ओर अवैध पार्किंग के कारण राहगीरों को आने-जाने में दिक्कत होती है, वहीं आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना भी मुश्किल हो जाता है। लोगों का आरोप है कि कार्रवाई नहीं होने से वाहन चालक बेखौफ होकर सार्वजनिक स्थानों पर वाहन खड़े कर रहे हैं।
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नगर निगम की महापौर सुमन ठाकुर ने कहा कि सभी वार्डों में अनधिकृत रूप से पार्क किए जा रहे वाहनों को हटाकर खाली स्थानों पर बच्चों के लिए छोटे-छोटे खेल परिसर विकसित किए जाएंगे। उनका कहना है कि उद्देश्य युवाओं को मोबाइल की दुनिया से बाहर निकालकर खेल गतिविधियों से जोड़ना है। जनसहयोग से वार्डों में बैडमिंटन, बास्केटबाल सहित अन्य खेलों के छोटे-छोटे कोर्ट विकसित किए जाएंगे। साथ ही वाहनों की पार्किंग के लिए भी उपयुक्त स्थान चिह्नित किए जाएंगे।
लोगों की राय
वार्डों की गलियां और खेल मैदान अब पार्किंग स्थल बन चुके हैं। प्रशासन को पार्किंग व्यवस्था की जांच के बाद ही वाहन पंजीकरण या लाइसेंस से जुड़ी प्रक्रिया को सख्ती से लागू करना चाहिए। -इंद्रपाल, निवासी सुहड़ा वार्ड
गलियों में जगह न बचने से बुजुर्गों, महिलाओं और स्कूली बच्चों को आने-जाने में परेशानी होती है। चौराहों पर खड़े वाहनों के कारण आमने-सामने से वाहन निकालना भी मुश्किल हो जाता है। -अशोक कुमार, निवासी महाजन बाजार, मंडी
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रात में किसी बुजुर्ग या मरीज की तबीयत बिगड़ जाए तो एंबुलेंस या निजी वाहन को घर तक लाना मुश्किल हो जाता है। पहले वाहन मालिकों को ढूंढना और गाड़ियां हटवाना पड़ता है, तब कहीं रास्ता खुलता है। -हरमीत सिंह बिट्टू, कारोबारी
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