थुनाग (मंडी)। शिकारी देवी वन्य जीव अभयारण्य में अनाधिकृत तरीके से सड़क निकालने के मामले में अब राष्ट्रीय वन्य जीव बोर्ड की टीम ने जांच शुरू कर दी है। बोर्ड के डीडीजी एसपी नेगी की अगुवाई में टीम रायगढ़ से शिकारी देवी तक छह किलोमीटर तक अनाधिकृत रूप से सड़क बनाने पर वन्य जीवों पर पड़े प्रभाव की जांच कर रही है।
टीम ने स्थानीय लोगों से पूछताछ के अलावा डीएफओ वाइल्ड लाइफ कुल्लू से शिकारी देवी वन्य जीव अभयारण्य का रिकाॅर्ड कब्जे में लिया है। राष्ट्रीय वन्य जीव की टीम में बोर्ड के डीआईजी राजा राम सिंह, फॉरेस्ट सर्वे आफ इंडिया और केंद्रीय वन, केंद्रीय पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय चंडीगढ़ के अधिकारी भी शामिल रहे। यह टीम एक सप्ताह में अपनी रिपोर्ट बोर्ड को देगी।
पूर्व सरकार के कार्यकाल में रायगढ़ से शिकारी देवी तक बनी इस सड़क की पहले से ही दो अलग-अलग जांच चल रही हैं। एक मामले में लोक निर्माण विभाग की भूमिका और दूसरे मामले में वन्य जीव विभाग में कार्यरत तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच चल रही है। अब इस मामले राष्ट्रीय वन्य जीव बोर्ड टीम ने भी जांच शुरू कर दी है।
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अरणयपाल वन्य जीव और सचिव पीडब्ल्यूडी भी जांच के दायरे में
सेंक्चुरी एरिया में सड़क बनाने के मामले में जांच अब अरणयपाल वन्य जीव और सचिव लोनिवि तक पहुंच गई है। इन दोनों अधिकारियों ने सड़क निर्माण के दौरान यहां का दौरा किया था और मामला उनके संज्ञान में था।
इसी मामले में ड्यूटी में कोताही बरतने के आरोप में वन्य प्राणी विभाग के आरओ, बीओ, गार्ड तथा लोनिवि के अधीक्षण अभियंता, अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता व कनिष्ठ अभियंता सहित कुल सात अधिकारियों को पहले ही चार्जशीट किया जा चुका है। अब मामला डीएफओ और अधीक्षण अभियंता से ऊपर अरणयपाल वन्य जीव और सचिवालय में सचिव स्तर तक के अधिकारी की भूमिका तक पहुंच गया है, जिससे प्रशासनिक स्तर पर हड़कंप मच गया है।