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हुरंग गांव में तीन दिवसीय काहिका उत्सव शुरू

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चौहारघाटी के हुरंग गांव में काहिका उत्सव की रस्म निभाने के लिए नंगे पांव जाता नड़ परिवार। संवाद - फोटो : Mandi
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पधर (मंडी)। चौहारघाटी के हुरंग गांव में काहिका मेला धूमधाम से शुरू हुआ। तीन दिवसीय देव समागम में अहम भूमिका निभाने वाला जोगेंद्रनगर के हराबाग का नड़ परिवार भूखे पेट नंगे पांव 12 घंटे की पदयात्रा करते हुए देर रात आठ बजे हुरंग गांव पहुंचा।
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इसके बाद देव हुरंग नारायण का मोहरा पुजारी इंद्र सिंह के सिर में बैठकर देवता की भराड़ी में आया। यहां देवता के परिवार का वास है। नड़ परिवार के मुखिया पवन कुमार ने भराड़ी के पास चार वेद खड़ी कर मुरगण रस्म की शुरुआत की। देर रात 12 बजे बाद नड़ पवन कुमार ने देव विधि के साथ देवाधिदेव हुरंग नारायण के इतिहास और मानव जाति के सृजन की कथा सुनाई। देव समागम के दूसरे दिन वीरवार को देव हुरंग नारायण के डांगु देव पेखरा गहरी सबसे पहले हुरंग मंदिर पहुंचेंगे। स्थानीय ग्रामीण देव पेखरा गहरी की भूखे पेट पूजा कर उनका स्वागत करेंगे।
देव पशाकोट के आगमन से दो दिन धूम्रपान की रहेगी छूट
बता दें कि हुरंग गांव में धूम्रपान को लेकर पूर्णत: प्रतिबंध है। पांच साल बाद दो दिन के लिए इसमें छूट मिलेगी। चौहारघाटी के बजीर नाम से विख्यात आराध्य देव पशाकोट का आगमन होगा। देव पशाकोट हुक्का तंबाकू के साथ देवता हुरंग नारायण के प्रांगण में आएंगे। इसके बाद दो दिन तक देव हुरंग नारायण के प्रांगण में वर्जित धूम्रपान की छूट रहेगी। यह छूट सिर्फ प्रांगण तक रहेगी। देव हुरंग नारायण के मंदिर में किसी भी प्रकार का तंबाकू का सेवन नहीं जाएगा।
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आज होगा देव मिलन
देव हुरंग नारायण के पुजारी इंद्र सिंह ने कहा कि हराबाग से नड़ परिवार के हुरंग पहुंचते ही तीन दिवसीय देव कारज शुरू हुआ। उन्होंने बताया कि घाटी के 7 अन्य देवता वीरवार सुबह देव हुरंग नारायण मंदिर में हाजिरी भरेंगे। इस दौरान देव मिलन प्रमुख आकर्षण होगा। इस अवसर पर छिद्रा रस्म शुरू की जाएगी। इसमें सबसे पहले देव हुरंग नारायण का छिद्रा नड़ परिवार की ओर से किया जाएगा।
नड़ पवन कुमार की होगी अग्नि परीक्षा
तीन दिवसीय काहिका मेला में मुख्य भूमिका निभाने वाले नड़ पवन कुमार शुक्रवार को अग्नि परीक्षा देंगे। छिद्रा रस्म निभाने बाद पवन कुमार देव हुरंग नारायण का मोहरा छूते ही अचेत हो जाएंगे। देव शक्ति से ही फिर पवन कुमार के प्राण लौटाएं जाएंगे। इसके लिए समागम में मौजूद सभी देवताओं के गुर और पुजारी देवता से नड़ की अचेत देह में प्राण लौटाने की देव हुरंग नारायण से गुहार लगाएंगे।
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