असुरक्षित भवन में चल रहा जोगिंद्रनगर में दमकल विभाग का कार्यालय
शौचालय और स्नानागार जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं, वाहन भी सुरक्षित नहीं
संवाद न्यूज एजेंसी
जोगिंद्रनगर (मंडी)। उपमंडल में आग और अन्य घटना से आम जनता को 24 घंटे सुरक्षित बचाने वाले दमकल विभाग के जवान खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। दमकल विभाग का कार्यालय करीब 60 साल पुराने असुरक्षित भवन में चल रहा है, जहां पर करीब 14 जवान खौफ के साए में रहने को मजबूर हैं।
हालत यह है कि कर्मचारियों के लिए शौचालय, स्नानागार जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं हैं। रसोईघर इस कदर बदहाल है कि बारिश के दौरान छतें टपकने लग पड़ती हैं। जोगिंद्रनगर में 2012 में अपने अस्तित्व में आए दमकल विभाग को कार्यालय चलाने के लिए बिजली बोर्ड के एक खंडहर भवन को सौंपा गया है। इसकी दीवारें तक टूट चुकी हैं। इसी भवन में रात्रि ठहराव करने वाले जवानों की सुविधाओं और संसाधनों की बात करें तो रिहायशी कमरों की छतें तक क्षतिग्रस्त हैं। इसमें सांप और बिच्छू के ठिकाने भी बने हुए हैं। हालांकि नए भवन के लिए दमकल विभाग ने कुछ भूमि चिह्नित की है, लेकिन यहां पर औपचारिकताओं का पेच निर्माण कार्य के लिए बाधा बना हुआ है। बता दें कि बीते 12 सालों में आग की करीब 487 घटनाओं में 98 करोड़ की संपत्ति दमकल विभाग की ओर से सुरक्षित बचाई जा चुकी है। बावजूद इसके दमकल के जवानों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए विभाग ही नहीं, बल्कि शासन और प्रशासन भी गंभीर नहीं है और अब खंडहर भवनों में दमकल के जवान जैसे तैसे अपने कार्य को पूरा कर रहे हैं।
जोगिंद्रनगर में दमकल विभाग की चौकी की सौगात पूर्व मंत्री गुलाब सिंह ठाकुर ने साल 2012 में दी थी। वीरवार को पूर्व मंत्री गुलाब सिंह ठाकुर ने कहा कि नए भवन के लिए अगर भूमि चिह्नित कर ली गई है तो राजस्व विभाग को इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए औपचारिकताओं को जल्द पूरा कर लेना चाहिए, तभी दमकल विभाग के जवान नए भवन में अपने कार्यालय के सपने को साकार कर सकेंगे। दमकल चौकी प्रभारी कर्म सिंह ने बताया कि दमकल विभाग के नए भवन के लिए चिह्नित भूमि में कुछ आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए विलंब हो रहा है। इसलिए असुरक्षित खंडहर भवन में ही अग्निशमन विभाग सेवाएं देने को मजबूर है। दमकल विभाग के उच्चाधिकारियों से इस विषय में पत्राचार जारी है और जल्द ही नए भवन का सपना साकार होगा।