मंडी। नगर परिषद मंडी में अवैध भवनों को नियमित करवाने में शहर के भवन मालिक रुचि नहीं दिखा रहे हैं। शहर में 1500 से अधिक अवैध भवन बने हुए हैं। सरकार ने अध्यादेश जारी कर कुछ शर्तों के साथ इन भवनों को नियमित करने के लिए आवेदन मांगे हैं। बावजूद इसके 30 दिनों में महज 20 भवन मालिकों ने भवन नियमितीकरण के लिए आवेदन किया है। शहरी ओपन स्पेस की शर्तों और भारी भरकम फीस को भरने में असमर्थता जाहिर कर रहे हैं।
शहर में 80 फीसदी से अधिक भवनों का निर्माण बिना नक्शों के हुआ है। शहर में जमीन की कमी के चलते एक के साथ एक घर सटा हुआ है। नगर परिषद के पार्षदों ने भी ओपन स्पेस व भवन नियमितीकरण की दरों में कमी करने की वकालत की है। नगर परिषद मंडी ने जून माह से भवन नियमितीकरण के लिए आवेदन मांगे थे। आवेदन करने के लिए 45 दिनों का समय शहरियों को दिया गया था। 30 दिन से अधिक का समय बीत चुका है। लेकिन, तीस दिनों में भवनों को नियमित करने के लिए महज 20 ही आवेदन नगर परिषद मंडी के पास पहुंचे। भवन नियमित करने के लिए शहरी 29 जुलाई तक आवेदन कर सकते हैं।
अध्यादेश में बदलाव की मांग को लेकर होगा मंथन
भवन नियमितीकरण अध्यादेश में बदलाव करने की मांग के सिलसिले में नगर परिषद मंडी में सोमवार को विशेष बैठक का आयोजन किया जाएगा। इसमें नगर परिषद अधिकारी और पार्षद भाग लेंगे। पार्षदों ने नगर परिषद के समक्ष अध्यादेश में बदलाव की मांग उठाई थी। जिस पर नगर परिषद ने बैठक कर चर्चा करने का निर्णय लिया है। भवन नियमितीकरण संघर्ष समिति मंडी ने प्रदेश सरकार के अध्यादेश में छोटे मकानों को नियमित करने की दरों में कमी लाने की मांग उठाई थी। इसके अलावा आवेदन करने की समय सीमा को 45 दिनों से बढ़ा कर कम से कम 6 माह करने की मांग भी समिति ने उठाई थी।
30 दिनों में महज 20 भवन मालिकों ने भवन नियमितीकरण के लिए आवेदन किया है। पार्षदों की मांग पर सोमवार को बैठक का आयोजन किया जाएगा। बैठक में सरकार के अध्यादेश पर चर्चा की जाएगी।
..उर्वशी वालिया कार्यकारी अधिकारी नप मंडी