मंडी। बरसात खत्म होने के बाद जल शक्ति विभाग के सहयोग से नगर निगम के प्राकृतिक जलस्रोतों के पानी की जांच होगी। इससे लोगों के बीच पेयजल की शुद्धता को लेकर शंका खत्म हो जाएगी।
मंडी शहर रियासत काल में पेयजल स्रोतों के लिए मशहूर रहा है। शहर में 50 से 100 मीटर के दायरे में प्राकृतिक जलस्रोत हैं। नगर निगम क्षेत्र में शिवा बावड़ी, डिबा बावड़ी, जैंचू नौण, पंडित की बावड़ी, पैहरों की बावड़ी और छाया बावड़ी प्राकृतिक जलस्रोत आज भी मौजूद हैं जिन पर लोगों की अधिक निर्भरता है। हालांकि ऊहल नदी के जल को भी शहर में जलापूर्ति के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इस साल बरसात की वजह से ब्यास किनारे प्राकृतिक जलस्रोतों में मलबा व दूषित पानी आया है। शहर के अन्य प्राकृतिक जलस्रोत भी बारिश के पानी व भूस्खलन के कारण प्रभावित हुए हैं। पेयजल स्रोतं की जांच के बाद लोगों की शंका दूर हो जाएगी। आयुक्त नगर निगम मंडी रोहित राठौर ने कहा कि बरसात खत्म होने के बाद शहर के प्राकृतिक जलस्रोतों के पानी की जांच की जाएगी।