प्रक्रियागत उलझनों में फंसी मंडी की ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट योजना
केंद्र ने अगला कदम उठाने से पहले राज्य से विस्तृत रिपोर्ट मांगी
नागरिक उड्डयन मंत्री ने सांसद कंगना रणौत को भेजे पत्र में स्पष्ट की स्थिति
संवाद न्यूज एजेंसी
गोहर (मंडी)। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के ड्रीम प्रोजेक्ट माने जा रहे मंडी जिले में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट को लेकर केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू किंजरापु ने सांसद कंगना रनौत को भेजे पत्र में बताया है कि इस परियोजना के लिए राज्य सरकार की ओर से आवश्यक प्रक्रियाएं अभी पूरी नहीं हुई हैं, जिसके कारण आगे की मंजूरी लंबित है।
पत्र के अनुसार, केंद्र सरकार ने ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट नीति-2008 के तहत 4 जुलाई 2022 को हिमाचल प्रदेश सरकार को मंडी के नागचला में एयरपोर्ट निर्माण के लिए ‘साइट क्लीयरेंस’ प्रदान की थी। इसके बाद राज्य सरकार को दो वर्ष के भीतर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के साथ ‘इन-प्रिंसिपल’ मंजूरी के लिए आवेदन करना था।
हालांकि निर्धारित समयसीमा में प्रक्रिया पूरी न होने पर इसे एक वर्ष के लिए बढ़ाकर 3 जुलाई 2025 तक किया गया था। अब राज्य सरकार ने साइट क्लीयरेंस की वैधता को 3 जुलाई 2026 तक बढ़ाने का अनुरोध किया है। केंद्र ने स्पष्ट किया है कि एयरपोर्ट परियोजना के क्रियान्वयन, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और वित्तीय व्यवस्था की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकार या परियोजना प्रस्तावक की होती है। साथ ही, केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों की स्थिति रिपोर्ट और ‘इन-प्रिंसिपल’ मंजूरी के लिए आवेदन की समयसीमा भी मांगी है, जिसकी प्रतीक्षा की जा रही है। केंद्र सरकार ने यह भी कहा है कि एयरपोर्ट विकास से जुड़े सुझावों का स्वागत किया जाएगा और उन पर उचित कार्रवाई की जाएगी।