मंडी अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव की दूसरी जलेब में लोगों का अभिवादन करते हुए मुख्य अत
मंडी। पल-पल बदलता मौसम, देवताओं की छड़ी थामे आगे बढ़ते कारदार, सोने-चांदी के मोहरों से सुसज्जित देव रथ और करनाल, नगाड़े व ढोल की गूंजती धुनों पर नाचते गाते देवलू...। आस्था, उल्लास और परंपरा का अद्भुत संगम वीरवार को अंतरराष्ट्रीय महाशिवरात्रि महोत्सव की दूसरी एवं मध्य जलेब में दोपहर बाद 3 बजे के बाद नजर आया।
तय समय से देरी से निकली यह भव्य जलेब श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। दोपहर 12 बजे से ही देवी-देवताओं के रथों के साथ देवलुओं का आगमन राज देवता माधो राय के दरबार में शुरू हो गया था। देखते ही देखते पूरा क्षेत्र देवमय हो उठा। छोटी काशी की गलियों में उमड़ी श्रद्धा की इस लहर को कैमरों में कैद करने की होड़ लगी रही।
दोपहर करीब 1 बजे से सेरी मंच और चानणी क्षेत्र में लोग अलौकिक दृश्य का साक्षी बनने के लिए बैठने लगे। करीब दो घंटे तक हजारों श्रद्धालु देवी-देवताओं के दर्शन की प्रतीक्षा में डटे रहे। जैसे ही दोपहर बाद लगभग 3 बजे राज देवता माधो राय के दरबार से जलेब रवाना हुई, सड़क किनारे और घरों की छतों पर खड़े लोगों ने देव रथों के पहुंचते ही शीश नवाकर आशीर्वाद लिया।
महोत्सव के दौरान शाही जलेब तीन बार निकाली जाती है- पहली शुभारंभ पर, दूसरी मध्य में और तीसरी समापन अवसर पर। तीनों जलेबों का अपना विशेष महत्व और रूतबा है। वर्षभर छोटी काशी में इस प्रकार की भव्य देव जलेब देखने को नहीं मिलती, जिससे इस आयोजन का महत्व और भी बढ़ जाता है।
.............
युवतियों और बुजुर्गों ने भी दिखाया जोश
दूसरी जलेब में युवाओं के साथ युवतियों और बुजुर्गों ने भी खूब जोश दिखाया। जलेब में युवतियां भी नाचती हुईं नजर आईं। बुजुर्ग पारंपरिक नृत्य करते हुए दिखे। हर वर्ग के लोगों की भागीदारी जलेब में रही।
000