तुंगल कला मंच के संस्थापक बोले, तुंगल हाट के लिए प्रशासन जगह करे चिह्नित
संवाद न्यूज एजेंसी
कोटली (मंडी)। उपमंडल मुख्यालय कोटली में पांच और छह अप्रैल को तुंगल महोत्सव पहली बार आयोजित किया गया। तुंगल महोत्सव क्षेत्रवासियों के दिलों में गहरी छाप छोड़ने के साथ यहां की प्राचीन संस्कृति को जीवंत कर गया। महोत्सव में पारंपरिक व्यंजन और पकवान आकर्षण का केंद्र रहे।
लोक कलाकारों ने मोरू, दाभड़ी, बिंदी, रिति गान जैसे तुंगली पारंपरिक लोकगीतों को मंच पर प्रस्तुत कर चार चांद लगा दिए। इक गल ओ सुणी के जाणा, मेरे बांबरुआ जैसे लोकगीत पर शहनाई की गूंज, ढोल की थाप पर क्षेत्र की प्रख्यात तुंगल नाटी की प्रस्तुति ने पूरे पंडाल में बैठे दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
महिला मंडल कोटली की ओर से बनाई गई कद्दू की खीर तथा महिला मंडल चलहर की देसी छाछ की भारी मांग रही। आयोजन के दौरान आए मुख्य अतिथियों में लेफ्टिनेंट कर्नल बीएस भारद्वाज ने आयोजन को आगे बढ़ाने में हरसंभव सहयोग करने का आश्वासन दिया है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बद्री सिंह ने आयोजन के लिए दो दिन नाकाफी बताते हुए उत्सव को ज्यादा दिनों तक बढ़ाए जाने का परामर्श दिया है। सेवानिवृत्त जिला न्यायवादी नेत्र सिंह कटोच ने क्षेत्र वासियों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर, जाति धर्म के भेदभाव को छोड़कर तुंगल क्षेत्र की एकता कायम करते हुए आयोजन को आगे बढ़ाने की अपील की है।
तुंगल कला मंच कोटली के संस्थापक प्रशांत मोहन ने कहा कि आने वाले समय में सरकार और प्रशासन से मांग की जाएगी कि इस प्रकार के आयोजन के लिए कोई स्थायी व्यवस्था की जाए। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि स्वयं सहायता समूह और महिला मंडलों के उत्पादों की प्रदर्शनी एवं बिक्री के लिए महीने में कम से कम एक बार कोई स्थान चिह्नित कर तुंगल हाट की व्यवस्था की जाए। संवाद