मंडी। सर्दी का सीजन आते ही मंडी शहर में मक्की की रोटी के साथ साग को लोग खूब पसंद कर रहे हैं। मंडी शहर में बढ़ती मांग से आबोहवा भी साग की खुशबू से महक रही है।
ग्रामीण इलाकों की महिलाएं घरों से साग और पौष्टिक सब्जियां लेकर शहर में पहुंच रही हैं, जिससे न सिर्फ वे अपनी आय बढ़ा रही हैं, बल्कि शहरवासियों को ताजे और स्थानीय उत्पाद मिल रहे हैं।
बल्ह, कटौला, द्रंग, कोटली, कोटमोर्स, मझवाड़ जैसे गांवों की महिलाएं पालक, हरा धनिया, बाथू, राई, सरसों और मिक्स साग 50 रुपये किलो तक बेच रही हैं, जबकि कुछ महिलाएं साग को काटकर 60 रुपये किलो तक बेच रही हैं। 40 रुपये किलो के हिसाब से गलगल, हरड़ 80 रुपये, छोटा आंवला 40 रुपये, बड़ा आंवला 80 और चटनी के लिए एलु 200 रुपये किलो बेच रही हैं।
चौहाटा बाजार, गांधी भवन के पास और आईटीआई पुल जैसे प्रमुख स्थानों पर इन महिला विक्रेताओं का कारोबार बढ़ता जा रहा है। औसतन, शहर में रोजाना दो से तीन क्विंटल साग बिक रहा है। कटौला की बेगी देवी बताती हैं कि वे रोजाना 15 से 20 किलो साग बेच रही हैं, जो उन्होंने तीन महीने पहले उगाई गई सरसों से तैयार किया है।
द्रंग टांडू की रमा देवी भी बताती हैं कि सर्दियों में शहरवासी गलगल और आंवला जैसी चीजों को काफी पसंद कर रहे हैं। वे इनकी कीमतें 40 रुपये किलो से लेकर 80 रुपये किलो के बीच बेच रही हैं। कोटली की मीना ने बताया कि वह गांव से 25-30 रुपये किलो सरसों खरीदकर उसे 50 रुपये में बेच रही हैं।
शहर के गांधी भवन के पास हरी सब्जी की खरीददारी करते शहरवासी। संवाद
शहर के गांधी भवन के पास हरी सब्जी की खरीददारी करते शहरवासी। संवाद