मंडी। हिमाचल किसान यूनियन में खींचतान बढ़ गई है। 19 जनवरी को प्रदेश स्तरीय बैठक में बर्खास्त किए गए किसान यूनियन मंडी के प्रधान करमू राम ने प्रदेशाध्यक्ष सीता राम को कानूनी नोटिस भेजकर पद से हटाने का कारण पूछा है। अधिवक्ता आकाश शर्मा के माध्यम से भेजे नोटिस में उन्होंने कहा कि उन्हें पद से हटाने से पहले कोई कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया गया, जो संगठन के संविधान का उल्लंघन है।
करमू राम ने आरोप लगाया कि यदि कार्यकारिणी में कोई मतभेद होते, तो यह पहले जिला कार्यकारिणी की बैठक में उठाया जाना चाहिए था, लेकिन उनके मामले में ऐसा नहीं हुआ। उन्हें अपना पक्ष रखने का कोई मौका नहीं दिया गया। 19 जनवरी को जाहू में हुई प्रदेश स्तरीय बैठक में मंडी जिला के किसान यूनियन के प्रधान करमू राम के चुनाव को निरस्त कर दिया गया था। करमू राम सात सितंबर 2024 को किसान यूनियन मंडी के प्रधान बने थे।
उन्होंने उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मामला हल नहीं हुआ, तो वह मंडी जिले में जनरल हाउस बुलाएंगे और राज्य स्तरीय किसान यूनियन की कार्यकारिणी का खुलासा करेंगे। करमू राम ने कहा कि जाहू में राज्यस्तरीय बैठक के दिन वह रिश्तेदार के निधन के कारण नहीं पहुंच पाए थे। इसकी जानकारी प्रदेशाध्यक्ष को पहले ही दे दी थी।
बता दें कि मंडी जिला किसान यूनियन के चुनाव 15 फरवरी से पहले सरकाघाट उपमंडल के पौंटा में करवाने का निर्णय लिया गया है।
पूर्व अध्यक्ष से मांगा था रिकॉर्ड
बर्खास्त जिला प्रधान करमू ने बताया कि पूर्व अध्यक्ष भूप सिंह और महासचिव दुनी चंद से दस्तावेज और रिकॉर्ड मांगा था। दो बार उन्हें पत्र भी लिखे गए थे। मगर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि दस्तावेजों से छेड़छाड़ कर घोटाला किया गया है। इसी वजह से उन्हें पद से हटाया गया है।
प्रदेशाध्यक्ष बोले- चुनाव में नियमों का उल्लंघन हुआ तभी हटाया
प्रदेशाध्यक्ष सीता राम ने कहा कि किसान यूनियन मंडी के चुनाव में 49 सदस्य मतदान के लिए चयनित किए थे। मगर 80 सदस्यों ने वोट डाले। सबसे ज्यादा मंडी सदर से 23 ने मतदान किया, जबकि यहां से सात सदस्य ही मतदान कर सकते थे। ऐसा ही धनोटू ब्लॉक में भी हुआ है। चुनाव के बाद मामला प्रधान पद के दूसरे उम्मीदवार भूप सिंह ने उठाया था। आठ सितंबर को जिला प्रधान को पत्र जारी किया था, उन्होंने उसका कोई जवाब नहीं दिया। 19 जनवरी को बैठक में फिर से मामला उठाया गया। इस दौरान सर्वसहमति से यह निर्णय लिया है। संविधान के नियमों का उल्लंघन करने पर ही यह कार्रवाई की गई है।