ऐतिहासिक महामृत्युंजय मंदिर का प्रदेश सरकार ने अधिग्रहण कर लिया है। इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी है। अधिसूचना बाद से मंदिर के मुख्य गेट पर ताला जड़ा है जिससे मंदिर में पूजा भी बंद है। यही नहीं सुबह-शाम मंदिर में आरती भी नहीं हो रही है जिससे लोगों की धार्मिक आस्था को ठेस पहुंच रही है।
पौराणिक व प्राचीन रियासतकालीन मंदिर बाबा भूतनाथ, गणपति मंदिर, नीलकंठ महादेव मंदिर व महामृत्युंजय मंदिर पत्थरों पर नक्कासी शैली के लिए अद्भूत है। महामृत्युंजय मंदिर पुरातत्व विभाग के अधीन है। करीब दो माह से महामृत्युंजय मंदिर के साथ तोडफ़ोड़ करने पर मंडी बचाओ संघर्ष मोर्चा की शिकायत पर प्रशासन व पुलिस महकमा हरकत में आया।
मोर्चा की शिकायत पर प्रशासन ने पुजारी के खिलाफ केस दर्ज किया था। उसके बाद प्रदेश सरकार ने मंदिर के अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की। भाषा एवं संस्कृति विभाग के माध्यम से सरकार ने अधिग्रहण की अधिसूचना जारी कर दी है। अब मंदिर के देखरेख का जिम्मा प्रशासन के पास होगा। अधिसूचना जारी होने के 15 दिन बाद मंदिर में ताला लगा है। मंदिर में न तो पूजा हो रही है और न ही पुजारी हैं।
मंडी बचाओ संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष लक्ष्मेंद्र सिंह ने कहा कि मंदिर अधिग्रहण की अधिसूचना जारी होने के बाद भी मंदिर में सुरक्षा का कोई प्रबंध नहीं है। मंदिर में ताला लटका हुआ है। यहां न तो पूजा हो रही और ही पुजारी को तैनात किया गया है।
उधर, एसडीएम सदर मदन कुमार ने कहा कि तहसीलदार को मंदिर अधिकारी की जिम्मेवारी सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि मंदिर अधिग्रहण की अधिसूचना के बाद सामान की लिस्ट तैयार होगी। जल्द ही मंदिर में श्रद्धालुओं को सुविधा प्रदान की जाएगी।