करसोग (मंडी)। कोलडैम के कारण बनी झील से तत्तापानी के पर्यटन को पंख लगे हैं। झील से निखरे तत्तापानी में अब साहसिक और रोमांचकारी गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। यह शहर अब मिनी गोवा के रूप में उभर रहा है।
साल 2015 में सतलुज नदी पर कोलडैम बनने के बाद बनी झील में आयोजित होने वाली विभिन्न मनोरंजक जलीय गतिविधियां, झील का प्राकृतिक सौंदर्य, गर्म पानी के चश्में, प्राकृतिक सौंदर्य से लबालब पहाड़ एक अलग ही अहसास करवाते हैं। पर्यटन नीति के तहत तत्तापानी झील में चलने वाली जेट स्की, स्पीड बोट, बंपर बोट, ई-फॉयल, वाटर स्की, एटीवी बाइक आदि पर्यटकों को आकर्षित कर रही हैं। वर्तमान में यहां 8 जेट स्की, 10 स्पीड बोट, एक बंपर बोट, एक बनाना राइड, 2 जेटोवेटर, 4 ई-फॉयल, 2 वाटर स्की और 2 एटीवी बाइक संचालित की जा रही हैं। प्रशिक्षित गाइड और चालकों की देखरेख में इनका संचालन किया जा रहा है।
मान्यता है कि यहां महर्षि जम्दग्नि ने वर्षों तक तपस्या की थी। यहां मौजूद गंधकयुक्त गर्म पानी प्राचीन काल से ही उपलब्ध है। तत्तापानी में गर्म जलस्रोत या कुंड का उद्घाटन प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 22 सितंबर, 1952 में किया था। वर्ष 1938 में नोबेल पुरस्कार विजेता कवि, साहित्यकार और दार्शनिक रविन्द्र नाथ टैगोर भी तत्तापानी का भ्रमण कर चुके हैं।
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देशभर से पर्यटक पहुंच रहे तत्तापानी
झील में आयोजित होने वाली जलक्रीड़ाओं का आनंद उठाने के लिए देशभर से पर्यटक तत्तापानी पंहुच रहे हैं। इनमें मुख्य रूप से दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों के पर्यटक शामिल हैं। पहाड़ों की रानी शिमला की सैर पर आने वाले पर्यटक अब तत्तापानी का भी रुख कर रहे हैं। पूर्व में वे केवल कुफरी, नालदेहरा, मशोबरा, नारकंडा आदि तक ही सीमित रहते थे।
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पर्यटन सीजन में प्रतिदिन पहुंच रहे 500 पर्यटक
स्थानीय कारोबारी एवं तत्तापानी वाटर स्पोर्ट्स एसोसिएशन के सचिव प्रेम रैना ने बताया कि झील में स्टिल वाटर गतिविधियां शुरू होने से क्षेत्र साहसिक और रोमांचक पर्यटन गंतव्य के रूप में उभरा है। पर्यटन सीजन में लगभग 100 से अधिक गाड़ियां और प्रतिदिन 400 से 500 पर्यटक तत्तापानी पहुंच रहे हैं। राज्य सरकार को भी अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो रहा है। एक वर्ष में लगभग 50 से 60 हजार पर्यटक तत्तापानी पहुंच चुके हैं।
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