गोहर (मंडी)। देवभूमि हिमाचल के प्राचीन मंदिर रहस्यों से भरे हुए हैं। इन मंदिरों से जुड़ी देव आस्था की बातें हर किसी को हैरान कर देती हैं। रियासतकाल में भी मंडी रियासत का डंका राजधानी दिल्ली में बजा था। मंडी के बड़ा देव कमरूनाग की बदौलत दिल्ली दरबार में मंडी के राजा जोगिंद्र सेन को सर्वश्रेष्ठ राजा का सम्मान मिला था।
जानकार बताते हैं कि दिल्ली दरबार में राजाओं के समक्ष शर्त रखी गई थी कि जो विशेष सिंहासन पहचानेगा वह सर्वश्रेष्ठ राजा कहलाएगा। इस पर राजा जोगिंद्र सेन ने देव कमरूनाग से मन्नत मांगी थी। देवता ने सपने में राजा जोगिंद्र सेन को दर्शन दिए और कहा कि दिल्ली दरबार में जिस सिंहासन पर सांप दिखेगा उसपर आप विराजमान हो जाना। दिल्ली दरबार में ठीक वैसा ही हुआ। दरबार में मंडी रियासत के राजा जोगिंद्र सेन को सर्वश्रेष्ठ राजा घोषित किया गया।
उपहार के रूप में राजा जोगिंद्र सेन ने देव कमरूनाग को मखमली कपड़े का सूरजपखा (पान का पता) भेंट किया था। इसपर भगवान विष्णु की मूर्ति बनाई गई है, जो आज भी देवता के भंडार में स्थापित है। इसके बाद देव कमरूनाग को मंडी के शिवरात्रि मेले में राजा जोगिंद्र सेन ने हर वर्ष के लिए आमंत्रित किया, जो परंपरा आज भी जीवित है।
देव कमरूनाग के पूर्व गूर ठाकर दास ने बताते हैं कि देवता का मूल स्थल नाचन क्षेत्र के कांढी कमरूनाग में है। पहले मंडी महाशिवरात्रि में अकेला कमरूनाग का गूर राजा जोगिंद्र सेन की परंपरा से पूर्व मंडी शिवरात्रि में भाग लेने के लिए जाता था। उसके बाद देवता की काहुलियां और एक जेठा नगाड़ा जाता था। मगर जोगिंद्र सेन राजा ने जब देवता को मखमली कपड़े का सूरजपखा भेंट किया तो उसके बाद मंदिर कमेटी ने देवता का चांदी और सोने का सूरजपखा तैयार किया। जो हर साल मंडी शिवरात्रि मेले में भाग लेने जाता है।