थुनाग (मंडी)। शिकारी देवी वन्य जीव अभयारण्य से सटे ईको सेंसिटिव जोन में जोनल मास्टर प्लान के तहत ही विकास कार्य अमल में लाए जा सकेंगे। पर्यावरण, वन और वन्य जीव, कृषि, राजस्व, पर्यटन, ग्रामीण विकास, पंचायती राज, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, शहरी विकास, नगर पालिका और लोक निर्माण विभाग को जोनल मास्टर प्लान तैयार करने का जिम्मा सौंपा गया है। यह सभी विभाग स्थानीय समुदायों की आवश्यकताओं और क्षेत्र की जनता के सुझाव के अनुसार मास्टर प्लान तैयार करेंगे।
केंद्र सरकार ने पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत ईको सेंसिटिव जोन की अधिसूचना को लागू करने के लिए नौ सदस्यीय निगरानी समिति का गठन किया है। यह निगरानी समिति जोनल मास्टर प्लान में प्रभावित गांवों की ओर से दी गई योजनाओं का मूल्यांकन कर उनको मंजूरी के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण संरक्षण मंत्रालय को भेजेगी।
निगरानी समिति की सिफारिश पर ही जोन में विद्यमान सड़कों को चौड़ा और पक्का करने के साथ ही नई सड़कों का निर्माण किया जा सकेगा। अस्पताल, स्कूल सहित बिजली पानी आदि की ईको फ्रेंडली योजनाएं बनाई जा सकेंगी। सामाजिक कार्यकर्ता सोहन लाल ने बताया कि ईको सेंसिटिव जोन थोपा गया है। इसका विरोध करेंगे और बुधवार को थुनाग में सभी प्रभावित रणनीति बनाएंगे। निगरानी समिति के सदस्य सचिव डीएफओ नाचन सुरेंद्र कश्यप ने बताया कि जोन में शामिल सभी 43 गांवों को जोनल मास्टर प्लान में 20 जनवरी तक योजनाओं के प्रस्ताव देने को कहा गया है। प्लान स्वीकृति के लिए पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भेजा जाएगा।
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ईको सेंसिटिव जोन में ग्राम पंचायत संगलवाड़ा, ढीम कटारू, गुड़ाह और पखरैर पंचायतें आती हैं। इसके लिए एक मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। इन पंचायतों को जोनल मास्टर प्लान के लिए योजनाएं देने को कहा गया है।
-प्रियंका वर्मा, बीडीओ सराज