मंडी। जिला मंडी के 109 विद्यालयों के विद्यार्थी अब विज्ञान, गणित, तकनीकी और इंजीनियरिंग के प्रोजेक्ट बनाने में कुशल होंगे। इन स्कूलों के पाठ्यक्रम अब कोडिंग ब्लाॅक्स और पाइथन प्रोग्रामिंग से जुड़ेंगे। बच्चों का किस क्षेत्र में रुझान है, इस बात का भी अब समय रहते पता चल पाएगा। स्कूलों में यह सब स्टेम एजुकेशन प्रणाली से संभव होगा।
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) मंडी में स्टेम एजुकेशन प्रशिक्षण शिविर के दूसरे दिन जिला स्टेम एजुकेशन समन्वयक विजय शर्मा ने बताया कि समग्र शिक्षा इस प्रशिक्षण के लिए वर्षभर अपना पूरा सहयोग देगी। हर सप्ताह इन 109 स्कूलों के 218 शिक्षकों का ऑनलाइन सेशन होगा। जब शिक्षक स्कूल जाकर स्टेम एजुकेशन के बारे में पढ़ाएंगे तो बच्चे इस कौशल से लाभान्वित होंगे। इससे बच्चों के सीखने के प्रतिफल में वृद्धि होगी और 21वीं शताब्दी के वैज्ञानिक कौशल से परिपूर्ण होंगे।
वह अपने आपको वैश्विक नागरिक के रूप में स्थापित करेंगे। आज की समसामयिक घटनाओं के दबाव के कारण शिक्षा के क्षेत्र में जो तीव्र गति से तकनीकी समस्याएं आ रही हैं उन समस्याओं में अध्यापकों और विद्यार्थियों में तालमेल बिठाने के लिए विदेशों की तर्ज पर हिमाचल प्रदेश में स्टेम एजुकेशन प्रणाली लागू की जा रही है। स्टेम एजुकेशन प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य कोडिंग ब्लॉक्स और पाइथन प्रोग्रामिंग से स्कूलों के पाठ्यक्रम को जोड़ना है। विद्यार्थी विज्ञान, गणित, तकनीकी और इंजीनियरिंग के प्रोजेक्ट बनाने में कुशल होंगे और इस प्रकार के कौशल सीखने के पश्चात वे भविष्य में इन कौशलों का अपने जीवन में उपयोग कर सकेंगे। दो दिवसीय प्रशिक्षण के मुख्य ट्रेनर पवन कुमार, अनिल कुमार, देव ऋषि और कमलजीत रहे। कार्यक्रम के अंत में डाइट के प्रधानाचार्य डॉ. दिनेश कुमार ने सभी प्रतिभागी अध्यापकों को सहभागिता प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। संवाद