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Mandi News: स्मार्ट वर्दी में स्मार्ट बनकर पहुंच रहे सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी

Thu, 02 May 2024 05:41 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
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मंडी। जिला मंडी सहित प्रदेशभर में इस बार सरकारी स्कूलों में ड्रेस कोड बदला है। ऐसे में स्मार्ट वर्दी में छात्र-छात्राएं स्मार्ट बनकर स्कूलों में पहुंच रहे हैं। कई सरकारी स्कूल प्रबंधनों ने अपने विद्यार्थियों के लिए नए रंग, नए डिजाइन की वर्दी शुरू की है। अब विद्यार्थियों ने इन वर्दियों में स्कूल में आना शुरू कर दिया है। अब बच्चों के मन में निजी और सरकारी स्कूल को लेकर द्वंद्व होता था, वह भी दूर हो गया है। नई वर्दी में विद्यार्थी बड़े उत्साह के साथ स्कूलों में पहुंच रहे हैं।
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वर्दियों की खास बात यह है कि सरकारी स्कूल अपने अपने स्तर पर कोई भी रंग, डिजाइन तैयार करके ड्रेस कोड तैयार करवा रहे हैं। इससे सरकारी और निजी स्कूलों में वर्दी से बच्चों को पहचान करने की सोच भी खत्म हो रही है। टाई और बेल्ट पर स्कूलों के नाम लिखे गए हैं। इसके अलावा प्री-प्राइमरी से लेकर जमा दो तक के विद्यार्थियों की वर्दियों के रंग और डिजाइन में भी अंतर हैं।
जिला मंडी के मंडी शहर की बात करें तो यहां के प्रमुख बाल और कन्या स्कूलों में इस बार वर्दी बदल दी गई है। राजकीय विजय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बाल मंडी में काली पैंट और सफेद कमीज, बेल्ट और टाई है। वहीं, प्राइमरी विंग में लड़कों के लिए नेवी ब्लू पैंट और सफेद कमीज और लड़कियों के लिए स्कर्ट और सफेद कमीज ड्रेस कोड है। दोनों के लिए टाई और बेल्ट भी हैं।
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उधर, राजकीय आदर्श कन्या वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला मंडी में जमा एक और दो की छात्राओं को गुलाबी रंग की वर्दी ब्लाउज डिजाइन में और छठी से 10वीं तक की छात्राओं के लिए ग्रे-रंग की वर्दी ब्लाउज के डिजाइन में लगाई गई है।
राजकीय आदर्श कन्या वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला के प्रधानाचार्य अनिल कटोच और राजकीय विजय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बाल मंडी की प्रधानाचार्या जयश्री कपूर ने कहा कि स्कूलों में नए-नए ड्रेस कोड शुरू किए हैं और सभी विद्यार्थियों के अभिभावक धीरे-धीरे वर्दी खरीदकर अपने बच्चों को इस वर्दी में स्कूल भेज रहे हैं।

सरकार से अभी तक नहीं मिल सके हैं वर्दी के लिए 600 रुपये
बता दें कि कांग्रेस सरकार ने पिछली सरकार के स्कूलों में वर्दी दिए जाने की योजना को बंद कर दिया था। सरकारी स्कूलों को वर्दी के लिए उनके खातों में 600 रुपये देने की योजना शुरू की थी। मगर अभी तक यह 600 रुपये विद्यार्थियों के खाते में नहीं आए हैं। बावजूद इसके अभिभावक अपने बच्चों को नई वर्दी खरीद रहे हैं। हालांकि जो अभिभावक वर्दी खरीद नहीं पा रहे हैं, उनपर स्कूल प्रबंधन अभी दबाव भी नहीं डाल रहे हैं।
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