नेरचौक (मंडी)। नेरचौक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में रैगिंग और मारपीट की लगातार सामने आ रही घटनाओं ने कॉलेज प्रबंधन की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
एंटी रैगिंग स्क्वाड की नियमित निगरानी, सख्त नियमों और परिसर में सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था के तमाम दावों के बावजूद हालात यह संकेत दे रहे हैं कि अनुशासन केवल फाइलों और कागजों तक ही सीमित रह गया है। जमीनी स्तर पर प्रभावी नियंत्रण नजर नहीं आ रहा, जिसका सीधा असर संस्थान की छवि पर पड़ रहा है।
कॉलेज प्रबंधन द्वारा दावा किया जाता रहा है कि रैगिंग रोकने के लिए एंटी रैगिंग स्क्वाड सक्रिय है। संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों के जरिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है। हाल ही में अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए ताकि किसी भी अनुशासनहीन गतिविधि को तुरंत रोका जा सके। बावजूद इसके रैगिंग और मारपीट की घटनाओं का सामने आना इन दावों की हकीकत उजागर कर रहा है।
इस बीच प्रशिक्षु के अभिभावक अपने बच्चाें की सुरक्षा के लिए चिंतित हैं। हर साल जूनियर छात्रों के साथ रैगिंग, मानसिक उत्पीड़न और मारपीट की शिकायतें सामने आ रही हैं। मामला कॉलेज प्रशासन तक पहुंचने के बाद प्रबंधन द्वारा जांच समितियां गठित कर कार्रवाई की औपचारिकताएं निभाई गईं जबकि घटनाओं को पहले से रोकने के लिए कोई ठोस और स्थायी व्यवस्था नजर नहीं आ रही है। एंटी रैगिंग स्क्वाड की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
नियमित निगरानी के दावों के बावजूद यदि घटनाएं हो रही हैं तो यह स्पष्ट करता है कि या तो निगरानी ढीली है या फिर उसे गंभीरता से लागू नहीं किया जा रहा। किसान सभा के उपाध्यक्ष परस राम ने कहा कि मेडिकल कॉलेज जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में इस तरह की घटनाएं न केवल छात्रों के मानसिक और शैक्षणिक माहौल को प्रभावित करती हैं, बल्कि संस्थान की साख पर भी दाग लगा रही हैं।
इस तरह की घटनाएं काॅलेज प्रबंधन की लापरवाही का नतीजा है। पढ़ा लिखा समाज इस तरह की हरकतें कर रहा है, यह भी चिंताजनक है। प्रशासन इस तरह की घटनाओं का संज्ञान लें।