सुनीता के अनुसार वारदात वाले दिन वह सुबह करीब साढ़े आठ बजे घर से घास लेने चली गई थीं। उन्होंने इस बात को गलत बताया कि उस दिन विकास का मां से झगड़ा हुआ और वह घर से नाराज होकर निकला था। उनका कहना है कि घटना से पहले गांव की दो महिलाओं का विकास से सामना हुआ था, लेकिन वह उनके सामने से सिर झुकाकर निकल गया। अगर उसका इरादा किसी की हत्या का होता तो वह उस समय भी कुछ कर सकता था।
उन्होंने कहा कि यदि उनके बेटे ने इतनी बड़ी वारदात की है तो पुलिस को खून से सने कपड़े, हुड और दराट जैसे सबूत स्पष्ट रूप से सामने लाने चाहिए। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं पुलिस रिमांड या लोगों के दबाव में आकर उनका बेटा चुप्पी तो नहीं साधे हुए है।
सुनीता ने कहा कि उनका परिवार पीड़ित पक्ष के साथ है और न्याय चाहता है। यदि तथ्यों और सबूतों के आधार पर यह साबित होता है कि विकास ने किसी के कहने पर भी यह कृत्य किया है, तो उसके लिए फांसी की सजा भी कम नहीं होगी। वहीं, उन्होंने यह भी कहा कि विकास का पहले किसी से झगड़ा, रंजिश या आपराधिक इतिहास नहीं रहा है और वह स्वभाव से कम बोलने वाला था।