नागरिक अस्पताल जोगिंद्रनगर में सस्ती दवा की दुकान पर दवाई खरीदते हुए तीमारदार। संवाद
जोगिंद्रनगर (मंडी)। जोगिंद्रनगर अस्पताल में मरीजों को उपचार के साथ निशुल्क दवाओं के लाभ के दावे फिर से खोखले साबित होने लगे हैं। 100 बिस्तर वाले जोगिंद्रनगर अस्पताल में इंजेक्शन, ग्लूकोज और ऑक्सीजन मास्क की कमी हो गई है। ऐसे में यहां भर्ती मरीजों के तीमारदारों को यह सब सामान निजी दुकानों से ही खरीदना पड़ रहा है, जबकि यह सरकारी स्तर पर निशुल्क उपलब्ध होते हैं।
डायरिया से ग्रस्त मरीजों को सिपरो इंजेक्शन भी अपने स्तर पर उपलब्ध करवाना पड़ रहा है। अस्पताल के विभिन्न रोगी वार्डों में दाखिल मरीजों को एनएस और डीएनएस ग्लूकोज की भी आपूर्ति मांगानुसार नहीं हो पा रही है। इंजेक्शन में इस्तेमाल होने वाली सीरिंज की भी किल्लत पड़ गई है।
नागरिक अस्पताल जोगिंद्रनगर में रोजाना 20 से 25 मरीज उपचार के लिए दाखिल हो रहे हैं। जिन्हें सरकारी दवाओं व इंजेक्शन का शत प्रतिशत लाभ नहीं मिल पा रहा है। बाहर से दवा खरीदकर अस्पताल में उपचार करवाने के लिए मध्यम वर्गीय परिवार के मरीजों की दिक्कतें बढ़ गई है। प्रतिदिन 300 ओपीडी वाले इस अस्पताल में चिकित्सीय संसाधनों की दरकार भी बनी हुई है। आनन फानन में कई बार गंभीर मरीजों को मंडी व कांगड़ा में रेफर करना पड़ रहा है।
तीमारदार सुरेंद्र, सुरेश, मोहन, रविंद्र व अन्य ने बताया कि अस्पताल में भर्ती मरीजों को सभी तरह की निशुल्क सुविधा नहीं मिल पा रहा है। कुछ चीजें निजी मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ रही है। अस्पताल प्रबंधन को चाहिए कि निशुल्क मिलने वाली हर सुविधाएं पुख्ता होनी चाहिए।
उधर, अस्पताल के एसएमओ डॉ. रोशन लाल कौंडल ने बताया कि मरीजों को स्वास्थ्य लाभ के साथ दवाओं की उपलब्धता भी अस्पताल प्रशासन की ओर से उपलब्ध करवाई जा रही है। चिकित्सा संसाधनों में विस्तार के प्रयास जारी है।
नागरिक अस्पताल जोगिंद्रनगर में सस्ती दवा की दुकान पर दवाई खरीदते हुए तीमारदार। संवाद