मंडी। चौहार घाटी के राजबन में बादल फटने की घटना के बाद लापता लोगों की खोजबीन के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। हालांकि हल्की बारिश ने चुनौती को और बढ़ा दिया है। प्रशासन ने घटना स्थल के साथ-साथ नीचे की तरफ भी खोज के प्रयास तेज कर दिए हैं, जहां लापता लोगों के बहने की आशंका जताई जा रही है।
प्रशासन इस मामले में किसी भी तरह की कोताही नहीं बरतना चाहता, और इसके लिए प्रशासनिक अधिकारी लगातार मौके पर मौजूद हैं। शुक्रवार दिन के अलावा रात को भी एडीएम डॉ. मदन कुमार राजबन में ही रुके रहे। शनिवार को मलबे के बीच पड़ी बड़ी चट्टानों को तोड़ने के लिए ब्लास्टिंग की जाएगी, ताकि इन चट्टानों को हटाकर लापता लोगों को ढूंढा जा सके।
प्रशासन को विभिन्न चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन जिले के बड़े अधिकारी मौके पर तैनात हैं और समन्वय के साथ काम कर रहे हैं। पहले दिन उपायुक्त अपूर्व देवगन और दूसरे दिन एसडीएम पधर भावना के बाद, एडीएम डा. मदन कुमार ने मोर्चा संभाल लिया है।
एडीएम डॉ. मदन कुमार ने कहा कि प्रशासन राहत और खोजबीन में पूरी तरह से जुटा हुआ है और एनडीआरएफ, एसडीआरएफ समेत करीब 60 जवान मौके पर काम कर रहे हैं। उपायुक्त अपूर्व देवगन ने भी पुष्टि की कि शनिवार को बड़ी चट्टानें तोड़ने का कार्य किया जाएगा और लापता लोगों को ढूंढने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।
आज एक साथ होगा पांच शवों का अंतिम संस्कार
पधर (मंडी)। राजबन में मलबे के शवों का अभी तक अंतिम संस्कार नहीं किया गया है। सभी शव स्कूल भवन में रखे गए हैं। मृतक सौजू राम के बेटे ज्ञान चंद गांव पहुंच गए हैं, जबकि दूसरा बेटा खेम सिंह जो लेह में ट्रेकिंग एजेंसी में काम करता है, शुक्रवार को गांव पहुंचेगा। सभी शवों का अंतिम संस्कार एक साथ शनिवार को किया जाएगा।
अपनों को ढूंढती रही आंखें, सूख गए नीर
मलबे के बीच अपनों की खोज में प्रभावितों की आंखें सूख गई हैं। माताओं का रो-रोकर बुरा हाल है, क्योंकि वे अपने बच्चों को मलबे से निकालते हुए नहीं देख पाईं। घटना के समय बच्चों से दूर होने का मलाल उन्हें घेर रहा है और उनका दर्द बढ़ता जा रहा है।