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एशियाई खेल 2026: सावन के रजत ने बढ़ाई चमक, सड़क और रेलवे ट्रैक पर दौड़कर एशियन गेम्स के पोडियम तक पहुंचे

Sun, 27 Sep 2026 10:58 AM IST
Ankesh Dogra संवाद न्यूज एजेंसी, जोगिंद्रनगर (मंडी)।

सार

Sawan Barwal Silver Medal Asian Games 2026 Jogindernagar Himachal Story: मंडी के जोगिंद्रनगर क्षेत्र के रड़ा भखेड़ गांव निवासी सावन बरवाल ने एशियन गेम्स में मैराथन का रजत पदक जीतकर हिमाचल को गौरवान्वित किया है। सावन की सफलता के पीछे उनके माता-पिता का वर्षों का संघर्ष भी जुड़ा है। जानें विस्तार से...
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सावन के रजत ने बढ़ाई चमक। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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सावन बरवाल की सफलता के पीछे माता-पिता का संघर्ष भी जुड़ा है। पिता कुलदीप बरवाल ने दिल्ली में 25 साल तक टैक्सी चलाकर परिवार की जरूरतें पूरी कीं। सीमित आय के बावजूद उन्होंने खर्चों में कटौती कर बेटे के प्रशिक्षण और खेल से जुड़े खर्चों को प्राथमिकता दी। मां सुभद्रा देवी ने भी सावन के खेल कॅरिअर को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि सावन की परवरिश आर्थिक चुनौतियों के बीच हुई। परिवार की स्थिति बेहतर नहीं थी, लेकिन उन्होंने बेटे के सपनों को पूरा करने में कोई कमी नहीं छोड़ी। सुभद्रा ने बताया दसवीं के बाद खेल प्रशिक्षक गोपाल ठाकुर ने प्रतिभा को पहचाना और उन्हें प्रशिक्षण देना शुरू किया। इसके बाद उसने पीछे नहीं देखा। वर्ष 2012 से 2018 तक जोगिंद्रनगर एथलेटिक सेंटर में कठिन अभ्यास के दौरान सावन ने अपनी प्रतिभा को निखारा। वर्ष 2014 में पाईका राष्ट्रीय खेलों में उन्होंने पहला कांस्य पदक जीता।

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पढ़ाई के साथ लिया प्रशिक्षण, सेना में हवलदार
सावन की प्रारंभिक शिक्षा भखेड़ स्कूल में हुई। उन्होंने दसवीं उच्च पाठशाला ऐहजू से की। 11वीं और 12वीं की पढ़ाई जोगिंद्रनगर से की। स्नातक के लिए राजीव गांधी राजकीय महाविद्यालय में दाखिला लिया। पढ़ाई के साथ वे जोगिंद्रनगर एथलेटिक सेंटर में खेल प्रशिक्षक गोपाल ठाकुर की अगुवाई में वर्ष 2018 तक प्रशिक्षण लेते रहे। इसके बाद सेना में हवलदार बने और खेल की बारीकियां सीखते रहे।



मैदान नहीं मिला तो सड़क, रेल ट्रैक पर दौड़कर किया अभ्यास
ऐहजू-मटरू सड़क और रेलवे ट्रैक के किनारे बनी पगडंडियां कभी सावन बरवाल के अभ्यास का मैदान हुआ करती थीं। गांव में बेहतर खेल मैदान और रनिंग ट्रैक नहीं था। ऐसे में महज 10 साल की उम्र में सावन इन्हीं सड़कों और रेलवे ट्रैक पर घंटों दौड़ लगाते थे। चार से छह घंटे की मेहनत और लगातार अभ्यास ने उन्हें एशियन गेम्स में भारत के लिए रजत पदक जीतने वाले धावक के मुकाम तक पहुंचाया। वे पहाड़ों से एशियन गेम्स के पोडियम तक पहुंचे। पहुंचने का सावन बरवाल का सफर आसान नहीं रहा। सेना में भर्ती होने के लिए दौड़ना शुरू करने वाले सावन ने सीमित संसाधनों और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अभ्यास जारी रखा। कड़ी मेहनत और लगातार प्रयास के दम पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।
 

सावन के पिता कुलदीप बरवाल ने बताया कि घर के पास से गुजरने वाली रेलवे पटरी के साथ बनी पगडंडियों पर भी बेटा नियमित दौड़ लगाता था। ऐहजू-मटरू सड़क उनकी शुरुआती दौड़ का प्रमुख अभ्यास स्थल रही। सुविधाओं की कमी के बावजूद सावन ने दौड़ को अपनी दिनचर्या बना लिया और घंटों अभ्यास करते रहे। दसवीं के बाद महज 14 साल की उम्र में खेल प्रशिक्षक गोपाल ठाकुर ने सावन की प्रतिभा को पहचाना। इसके बाद उन्हें एथलेटिक सेंटर जोगिंद्रनगर में प्रशिक्षण का अवसर मिला। यहां से शुरू हुआ सफर राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से होते हुए अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचा और अब एशियन गेम्स के पोडियम पर रजत पदक के साथ उनकी मेहनत को बड़ी पहचान मिली है।

मां से बोले सावन ओलंपिक में स्वर्ण पदक लाऊंगा
शनिवार सुबह करीब 7:30 बजे सावन ने मां सुभद्रा और पिता कुलदीप को वीडियो कॉल किया। सावन ने मां से कहा, एशियन गेम्स में रजत पदक जीता है, अब ओलंपिक में देश के लिए स्वर्ण पदक लाऊंगा। बेटे की आवाज सुनते ही मां सुभद्रा और पिता कुलदीप की आंखों में खुशी के आंसू छलक आए। मां ने बेटे की जीत पर खुशी जताई, जबकि पिता कुलदीप ने कहा कि उन्हें अपने बेटे पर नाज है। उन्होंने कहा कि सावन के घर लौटने पर परिवार उसका गर्मजोशी से स्वागत करेगा।

रड़ा भखेड़ गांव के धावक की उपलब्धि की खबर फैलते ही परिवार को बधाइयां मिलने का सिलसिला शुरू हो गया। दादी कला देवी, बड़े भाई सुमित और भाभी श्वेता बरवाल ने कहा कि सावन की उपलब्धि से पूरे परिवार का सिर गर्व से ऊंचा हुआ है। पदक जीतने की खबर के बाद से घर में खुशी का माहौल बना हुआ है।

बधाई देने वालों का लगा तांता
सावन की जीत की खबर मिलते ही रड़ा भखेड़ गांव में जश्न का माहौल बन गया। बधाई देने वालों का देर रात तक तांता लगा रहा। इस दाैरान मिठाई भी बांटी गई। जोगिंद्रनगर रोटरी क्लब के रोटेरियन अजय ठाकुर, रामलाल वालिया, एनआर बरवाल और शेर सिंह समेत अन्य लोगों ने सावन के घर पहुंचकर उनके माता-पिता और परिवार के सदस्यों को बधाई दी। मिठाई बांटकर खुशी जताई गई। विधायक प्रकाश राणा, पूर्व मंत्री गुलाब सिंह ठाकुर, कांग्रेस नेता जीवन ठाकुर, प्रदेश भाजपा प्रवक्ता पंकज जम्वाल, भाजपा नेता मेघना ठाकुर और व्यापार मंडल अध्यक्ष भास्कर गुप्ता ने भी सावन की उपलब्धि पर परिवार को बधाई दी।

बेटे की लाइव परफॉर्मेंस देखने के लिए रातभर बेचैन रहे माता-पिता, सुबह चार बजे जागे
बेटे सावन बरवाल की मैराथन का लाइव प्रसारण देखने के लिए मां और पिता शुक्रवार रात से बेचैन थे। शनिवार सुबह करीब चार बजे दोनों एलईडी स्क्रीन के सामने बैठ गए। दो घंटे से अधिक चली दौड़ के दौरान मां की आंखें लगातार स्क्रीन पर टिकी रहीं और कई बार खुशी के आंसू छलक पड़े। 
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पिता कुलदीप भी पूरे समय बेटे की दौड़ पर नजर रखे रहे
मां सुभद्रा ने बताया कि दौड़ के दौरान बेटे का संघर्ष और देश के लिए बहता पसीना देखकर वह भावुक हो गईं। जैसे-जैसे सावन लक्ष्य की ओर बढ़ रहा था, परिवार की धड़कनें भी बढ़ती जा रही थीं। अंतिम क्षणों में सावन ने जब रजत पदक पक्का किया तो परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने कहा कि सावन ने देश के लिए पदक जीतने के लिए लंबे समय तक कड़ी मेहनत की और रास्ते में आई हर बाधा को पार किया। उसके सपने को पूरा करने के लिए परिवार ने भी हरसंभव प्रयास किया। अब एशियाई खेलों में बेटे की इस बड़ी उपलब्धि ने वर्षों के संघर्ष और मेहनत को सार्थक कर दिया है।
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