गांव में फैला था डायरिया, अधिकांश लोग बावड़ी से ही पीते थे पानी, विभाग ने भरे से सैंपल
गांव में अब स्थिति सामान्य, अधिकांश मरीज अस्पताल से लौटे घर
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। मंडी सदर क्षेत्र की पंचायत धार के मढ़धार में फैले डायरिया मामले में गांव की प्राकृतिक बावड़ी के पानी का सैंपल फेल पाया गया है। गांव के अधिकांश लोग इसी बावड़ी से पानी पी रहे थे। डायरिया का प्रकोप बढ़ने पर जल शक्ति विभाग ने गांव के करीब आधा दर्जन पेयजल स्रोतों से सैंपल भरे थे।
धार पंचायत के वार्ड पंच अश्वनी कुमार ने बताया कि अस्पताल व घरों में उपचार ले रहे करीब 35 मरीजों में से अब मात्र 8 लोग ही डायरिया पीड़ित हैं। इनमें से 4 लोग अस्पताल में उपचाराधीन हैं और 4 लोगों का घर पर उपचार चल रहा है। चार दिन पूर्व अस्पताल में भर्ती 7 लोगों में से अधिकांश को छुट्टी दे दी गई है। शनिवार सुबह भूपेंद्र पुत्र यादव की दबियत बिगड़ने पर उसे जोनल अस्पताल में दाखिल करवाया गया है, जबकि दिव्य भारती, लज्या देवी और स्योगी देवी अभी अस्पताल में दाखिल है। बता दें कि चार दिन पूर्व धार पंचायत के मढ़धार गांव में अचानक डायरिया का प्रकोप बढ़ने से करीब दो दर्जन लोग जोनल अस्पताल में भर्ती हुए थे। और इतने ही लोग घरों में उपचार ले रहे थे। अचानक डायरिया मरीजों का आंकड़ा बढ़ने पर स्वास्थ्य व जल शक्ति विभाग ने गाव का दौरा कर पीडितों को दवाइयां और ओआरएस घोल देकर उपचार दिया। जल शक्ति विभाग के कर्मचारियों ने गांव के करीब आधा दर्जन पेयजल स्रोतों को साफ कर उनमें क्लोरीन डाला और सैंपल भी भरे थे। जांच के दौरान विभाग ने एक प्राकृतिक बावड़ी का सेंपल फेल पाया था। जल शक्ति विभाग के अधिशासी अभियंता राज कुमार सैनी ने बताया कि विभाग द्वारा डायरिया पीडित गांव के जल स्रोतों की सैंप्लिंग कर साफ सफाई की थी। शुक्रवार को आई सैंप्लिंग रिपोर्ट में एक बावड़ी का पानी दूषित पाया गया है। जहां से ग्रामीण अक्सर पेयजल का प्रयोग करते थे। कहा कि अक्सर खुले प्राकृतिक पेयजल स्रोतों में पेड़ पौधों की पत्तियां सड़ने, दूषित पानी मिलने या जानवरों द्वारा पानी पीने से पानी दूषित हो जाता है। जिससे डायरिया होने का अंदेशा बढ़ जाता है।
शनिवार को भी विभागीय दल ने गांव के जल स्रोतों का क्लोरिनेशन कर ग्रामीणों को विभागीय नलों का पानी प्रयोग करने की अपील की है और प्राकृतिक जल स्रोतों के पानी को उबाल कर पीने का आग्रह किया है।