इसके बाद यहां पर पहाड़ों के चट्टानी नमक को बनाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। देश में केवल मात्र मंडी जिले के ट्रंग, मैगल और गुम्मा की पहाड़ियों में ही यह संपदा उपलब्ध है। इन पहाड़ियों में करीब 116 मिलियन टन नमक का भंडार मौजूद है। नमक को रिफाइनरी में खाने योग्य बनाया जाएगा। यह नमक पूरी तरह प्राकृतिक और शुद्ध होगा। ट्रंग और गुम्मा की नमक खदान में 1963 में पारंपरिक रूप से चट्टानी नमक का उत्पादन शुरू हुआ था। साल 2011 में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से गैर वन स्वीकृति व रायल्टी जमा न करवाने से यहां उत्पादन बंद हो गया था।
इसके बाद साल 2016 में तत्कालीन सांसद दिवंगत राम स्वरूप शर्मा ने तीन करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान कर खदान का दोबारा शुभारंभ करवाया था। नमक निकालने के लिए करीब 35 मीटर लंबी टनल भी बनाई गई थी लेकिन इसके बाद खाने योग्य नमक का उत्पादन शुरू नहीं हो पाया। मैगल में तैयार होने वाले चट्टानी नमक को हर रोज खाने में उपयोग कर इस्तेमाल किया जाएगा। वर्तमान में लोग भोजन में मिला कर जिस नमक का उपयोग करते हैं वह समंदर के पानी को विभिन्न प्रक्रियाओं से तैयार किया जाता है। पाकिस्तान से आयात होने वाला सेंधा नमक इससे अलग है।
मैगल में चट्टानी नमक को तैयार करने के लिए रिफाइनरी लगाई जाएगी। इंडियन ब्यूरो ऑफ माइन को प्लान बना कर मंजूरी के लिए भेज दिया है। उम्मीद है जल्द मंजूरी मिल जाएगी।- प्रेम रंजन सिंह, चीफ मैनेजर, हिंदुस्तान साल्ट लिमिटेड