जोगिंद्रनगर/मंडी। जिले में प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों को राहत का इंतजार है। अभी भी जिले में 40 से अधिक सड़कें बंद हैं। जोगिंद्रनगर डिविजन में करीब 25 तो सराज और करसोग में पांच-पांच, थलौट में चार और मंडी सदर में एक सड़क पर यातायात बंद है। ऐसे में लोगों को परेशानी हो रही है। रोजमर्रा के उत्पादों का संकट गहराने लगा है। मंडी-पठानकोट एनएच कोटरोपी के पास बहाल नहीं हो सकी है। जोगिंद्रनगर में 25 से अधिक सड़कें बंद रहने से ग्रामीणों को जरूरी सामान लाने के लिए भी दिक्कतें पेश आ रही हैं।
बिजली, पेयजल संकट के बीच कीचड़ और पत्थर से लबालब इन सड़कों पर ग्रामीणों का सफर जोखिम भरा हो चुका है। बंद पड़ी सड़कों को बहाल न करने पर ग्रामीणों में आक्रोश है। नोहली ब्यूं व लडभड़ोल क्षेत्र की कई एंबुलेंस सड़कें अभी भी बंद पड़ी हैं। बैजनाथ लडभड़ोल और सांढापतन सड़क पर लगातार हो रहे भूस्खलन से लोगों का जनजीवन प्रभावित हुआ है। फसलें भी खेतों में खराब होने लगी हैं। आपदा से बेघर हुए परिवारों को भले ही प्रशासन ने सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कर दिया है, लेकिन उन्हें अभी भी आवश्यक संसाधनों की कमी खल रही है। करीब 25 परिवार प्राकृतिक आपदा से प्रभावित होकर बेघर हुए हैं। यह सभी प्रकार सरकारी सहायता का इंतजार कर रहे हैं। राजस्व विभाग ने नुकसान का आकलन कर लिया है, लेकिन फौरी राहत अभी भी अधिकांश प्रभावित परिवारों को नहीं मिल पाई है। उधर, एडीएम अश्वनी कुमार ने कहा कि सड़कों को बहाल करने का काम जारी है।
बाढ़ से 25 पुलियां और पुल ध्वस्त, 25 करोड़ का नुकसान
जोगिंद्रनगर उपमंडल में बरसात में अभी तक 25 पुलियां व पुल ध्वस्त हो जाने से लोक निर्माण विभाग को 25 करोड़ का नुकसान हो चुका है। 27 कल्वर्ट भी बारिश की भेंट चढ़ गए। 614.18 किलोमीटर कच्ची व पक्की सड़कों को नुकसान पहुंचा है। शनिवार और रविवार को हुई बारिश से लोक निर्माण विभाग की 18 सड़कों को 68 लाख का नुकसान पहुंचा है। पांच मुख्य सड़कें अभी भी बंद हैं।
यह सड़कें बंद
हणोगी- बांधी, मोना-थनोगी-बनोगी- कांडा, लोट- फर्श, हटौन- भवास- बोंश-मुथल, खदारगली- सोमाकोठी, चूहरडधार- कटौलू, कोटलू- नैंज, कोटलू- कटांडा, तेबन- जेई, भैंथल- सनारली, थुनाग- केटली-जैंशला, लंबाथाच- चियूनी- चेत- शाटाधार, जंजैैहली- भेखली और चैल-जंजैहली आदि मुख्य मार्गों में यातायात अभी भी बंद है।