आरती चौहान।संवादमहिला उत्थान वाली खबर के साथ
चंबा। मुश्किल हालात इंसान की राह जरूर कठिन कर सकते हैं लेकिन मजबूत हौसले के आगे कोई परिस्थिति ज्यादा देर तक टिक नहीं सकती। चंबा के घांघणी गांव की आरती चौहान ने इसे अपनी जिंदगी में साबित कर दिखाया है। पिता महेंद्र कुमार के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारियों का बोझ बढ़ा, लेकिन आरती ने परिस्थितियों के आगे घुटने टेकने के बजाय अपने पैरों पर खड़े होने का रास्ता चुना। आरती वर्तमान में मेडिकल कॉलेज में एक अधिकारी की गाड़ी चलाकर परिवार की जिम्मेदारियों में हाथ बंटा रही हैं। उन्होंने राजीव गांधी स्वरोजगार योजना के तहत अपनी गाड़ी खरीदी है। मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर वह आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रही हैं। आरती को वाहन चलाने की प्रेरणा अपने पिता से मिली है। बचपन में पिता को गाड़ी चलाते देखकर उनके मन में भी ड्राइविंग सीखने की इच्छा पैदा हुई। समय के साथ यही रुचि उनके लिए रोजगार का जरिया बन गई। पिता के निधन के बाद उन्होंने इस हुनर को अपनी ताकत बनाया और रोजी-रोटी के लिए इसे पेशे के रूप में अपना लिया।
आत्मनिर्भर बनने की राह में आरती ने कई तरह के काम किए। उन्होंने कुछ समय तक चौमिन और मोमो की रेहड़ी लगाकर भी परिवार की मदद की। उनका मानना है कि महिला के लिए कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता। जरूरी है तो मेहनत करने का जज्बा और खुद पर विश्वास। गृहिणी मां विमला देवी, बहन पूजा शर्मा और भाई अरुण कुमार के साथ आरती का परिवार है। विपरीत परिस्थितियों में खुद को संभालकर आगे बढ़ने वाली आरती आज क्षेत्र की महिलाओं और युवतियों के लिए प्रेरणा बन रही हैं। उनकी कहानी बताती है कि आत्मनिर्भर बनने की दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो मुश्किल परिस्थितियों के बीच भी नई राह बनाई जा सकती है।