मंडी। सर्वाइकल स्पाइन के इलाज के लिए अब मंडी और आसपास जिलों के लोगों को शिमला, टांडा या चंडीगढ़ जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, उनका इलाज नेरचौक मेडिकल कॉलेज में ही हो जाएगा। कॉलेज में अब तक चार मरीजों का इलाज हो चुका है।
मेडिकल कॉलेज की इस उपलब्धि से रोगियों को बहुत अधिक राहत मिलेगी। आर्थो विभाग की टीम ने सर्वाइकल स्पाइन सर्जरी शुरू कर दी है। चार मरीजों के सफल ऑपरेशन किए गए हैं। इनमें एक 17 वर्षीय किशोर भी शामिल है। पहले मरीजों को आईजीएमसी शिमला, टांडा मेडिकल कॉलेज कांगड़ा या पीजीआई चंडीगढ़ जाना पड़ता था।
आर्थो विभागाध्यक्ष डॉ. संदीप कालिया, डॉ. अमित सलारिया, डॉ. लोकेश, डॉ. वीरेंद्र नेगी, डॉ. कुलदीप और डॉ. पुनीत कटोच की टीम ने नेरचौक मेडिकल कॉलेज में सर्वाइकल स्पाइन के ऑपरेशन आरंभ किए हैं। यहां रीढ़ की हड्डी में चोट के ऑपरेशन भी हो रहे हैं। मंडी, कुल्लू, लाहौल स्पीति, बिलासपुर और हमीरपुर जिलों के मरीजों को अब राहत मिलेगी। आर्थो विभागाध्यक्ष डॉ. संदीप कालिया ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में सर्वाइकल स्पाइन से पीड़ित 120 के करीब मरीज एक माह में आते हैं। इनमें 10 से 20 मरीजों को ही ऑपरेशन (सर्जरी) की जरूरत रहती है।
हिमकेयर या आयुष्मान कार्ड से फ्री इलाज: एमएस
मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पीएल वर्मा ने बताया कि ऑपरेशन पर 30,000 से एक लाख रुपये तक का खर्च आता है। हिमकेयर, आयुष्मान भारत योजना में इलाज निशुल्क रहा है।
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केस वन
सरकाघाट के अपर बरोट निवासी 17 वर्षीय यशवंत पेड़ से गिर गया था। इससे उसकी गर्दन की हड्डी में चोट लग गई। हाथ और पैरों ने काम करना बंद कर दिया था। पिता मस्त राम अपने बेटे को नेरचौक मेडिकल कॉलेज ले आए। यहां डॉक्टरों ने उसका ऑपरेशन करने का फैसला लिया। इसी वर्ष 14 जनवरी को उसका सफल ऑपरेशन हुआ। यशवंत अब बातचीत कर रहा है। हाथ और पैरों में हलचल बढ़ती जा रही है।
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