तुंगलघाटी में हुई है सबसे ज्यादा ओलावृष्टि
संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी। पिछले दिनों हुई बारिश से सरकाघाट, धर्मपुर, बल्ह, नाचन और सदर उपमंडलों में गेहूं की फसल पूरी तरह भीग गई है। हालांकि, किसानों ने अब गेहूं की कटाई जोरशोर से शुरू कर दी है। तुंगल घाटी में हुई अत्यधिक ओलावृष्टि, अंधड़ और बारिश से गेहूं की फसल खेतों में बिछकर खराब हो गई। तुंगल घाटी के डंढाल गांव में करीब 10 टन से अधिक गेहूं की फसल खराब हुई है। पीड़ित किसानों का कहना है कि महंगे बीज और खाद डालने के बाद इस बार बारिश ने सब तबाह कर दिया है। ओलावृष्टि और अंधड़ ने उनकी छह माह की मेहनत पर पानी फेर दिया है। डंढाल के लाभ सिंह और शीला देवी ने बताया कि उनका खेतीबाड़ी से ही परिवार का पालन-पोषण चलता है। नाचन क्षेत्र के बागवान हेम सिंह, परमा राम, देवीराम आदि ने बताया कि गेहूं सहित सेब, खुमानी, प्लम और आड़ू की फसल ओलावृष्टि से खराब हुई है। गोहर स्थित बागवानी विशेषज्ञ डॉ. एसपी भारद्वाज ने कहा कि मौसम में अस्थिरता से सेब उत्पादन पर सीधा असर पड़ा है। ओलावृष्टि से गुठलीदार फल पेड़ों से नीचे गिर गए हैं। जिला कृषि उप निदेशक रामचंद्र चौधरी का कहना है कि अधिकांश इलाकों में अभी गेहूं की फसल को बारिश से नुकसान नहीं है। किसानों को विभाग की ओर से बेहतर गुणवत्ता वाले तिरपाल दिए गए हैं। किसान जरूरत अनुसार फसल कटाई कर मौके पर ही थ्रेसिंग कर फसल को सुरक्षित रख रहे हैं। जिले में अभी गेहूं की फसल को कोई नुकसान नहीं है।
मंडी। पिछले दिनों हुई बारिश से सरकाघाट, धर्मपुर, बल्ह, नाचन और सदर उपमंडलों में गेहूं की फसल पूरी तरह भीग गई है। हालांकि, किसानों ने अब गेहूं की कटाई जोरशोर से शुरू कर दी है। तुंगल घाटी में हुई अत्यधिक ओलावृष्टि, अंधड़ और बारिश से गेहूं की फसल खेतों में बिछकर खराब हो गई। तुंगल घाटी के डंढाल गांव में करीब 10 टन से अधिक गेहूं की फसल खराब हुई है। पीड़ित किसानों का कहना है कि महंगे बीज और खाद डालने के बाद इस बार बारिश ने सब तबाह कर दिया है। ओलावृष्टि और अंधड़ ने उनकी छह माह की मेहनत पर पानी फेर दिया है। डंढाल के लाभ सिंह और शीला देवी ने बताया कि उनका खेतीबाड़ी से ही परिवार का पालन-पोषण चलता है। नाचन क्षेत्र के बागवान हेम सिंह, परमा राम, देवीराम आदि ने बताया कि गेहूं सहित सेब, खुमानी, प्लम और आड़ू की फसल ओलावृष्टि से खराब हुई है। गोहर स्थित बागवानी विशेषज्ञ डॉ. एसपी भारद्वाज ने कहा कि मौसम में अस्थिरता से सेब उत्पादन पर सीधा असर पड़ा है। ओलावृष्टि से गुठलीदार फल पेड़ों से नीचे गिर गए हैं। जिला कृषि उप निदेशक रामचंद्र चौधरी का कहना है कि अधिकांश इलाकों में अभी गेहूं की फसल को बारिश से नुकसान नहीं है। किसानों को विभाग की ओर से बेहतर गुणवत्ता वाले तिरपाल दिए गए हैं। किसान जरूरत अनुसार फसल कटाई कर मौके पर ही थ्रेसिंग कर फसल को सुरक्षित रख रहे हैं। जिले में अभी गेहूं की फसल को कोई नुकसान नहीं है।