थुनाग (मंडी)। केयोलीधार में निर्माणाधीन वन विश्राम गृह मामले में वन विभाग हरकत में आ गया है। वन विभाग ने ठेकेदार को अग्रिम भुगतान करने वाले तत्कालीन डीएफओ, रेंज ऑफिसर और अकाउंटेंट को चार्जशीट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों पर वित्तीय नियमों का उल्लंघन कर ठेकेदार को अग्रिम भुगतान का आरोप है।
वन विभाग ठेकेदार को विश्राम गृह बनाने के लिए अब तक लगभग 83 लाख रुपये जारी कर चुका है, लेकिन मौके पर काम सिर्फ 57 लाख रुपये का ही हुआ है। वन विभाग की तकनीकी टीम की रिपोर्ट के बाद यह मामला सामने आया। रिपोर्ट के अनुसार ठेकेदार ने काम बीच में ही छोड़ दिया था। इस बीच तत्कालीन वन विभाग के अधिकारियों ने ठेकेदार को लगभग 25 लाख रुपये की अग्रिम पेमेंट जारी कर दी।
2019-2020 में आवंटित टेंडर के मुताबिक इस भवन का निर्माण कार्य पूरा करने के लिए पांच महीने का समय तय किया गया था, लेकिन पांच साल बीतने के बाद भी निर्माण अधर में लटका है। रिपोर्ट में यह भी पाया गया है कि ठेकेदार ने पेमेंट मिलने के बावजूद कार्य पूरा नहीं किया। ठेकेदार को काम पूरा करने के लिए वन विभाग ने कई नोटिस थमाए। वन विभाग ने विश्राम गृह का काम पूरा करने के लिए छह माह का अतिरिक्त समय भी दिया, लेकिन ठेकेदार ने रुचि नहीं दिखाई। विश्राम गृह का काम रुकने से अब यह भवन बनने से पहले ही खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। समय पर निर्माण कार्य पूरा न होने से इसकी लागत भी बढ़ गई है। इससे वन विभाग को लाखों रुपये का नुकसान होने की आशंका है। प्रधान मुख्य अरण्यपाल डॉ. पवनेश कुमार ने कहा कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की जा चुकी है।
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ठेकेदार और उसे एडवांस पेमेंट करने वाले तत्कालीन डीएफओ, रेंज ऑफिसर और अकाउंटेंट के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। चार्जशीट स्वीकृति के लिए मुख्य अरण्यपाल के शिमला स्थित कार्यालय को भेज दी है।
-सुरेंद्र कश्यप, डीएफओ, नाचन