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Mandi News: मुआवजा बढ़ाने के लिए दायर याचिकाएं खारिज

सार

मंडी जिला न्यायालय ने नेरचौक-मनाली फोरलेन परियोजना के भूमि अधिग्रहण मुआवजा बढ़ाने संबंधी भूमि मालिकों की याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत ने मध्यस्थ द्वारा तय मुआवजा अवार्ड को वैधानिक और उचित माना।
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विस्तार
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मंडी। जिला न्यायाधीश मंडी की अदालत ने नेरचौक-मनाली फोरलेन परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के बाद मुआवजा बढ़ाने की मांग के संबंध में भूमि मालिकों की ओर से दर्ज याचिकाओं को खारिज किया। अदालत ने डिविजनल कमिश्नर (मध्यस्थ) की ओर से 28 जून 2024 को पारित किया गया मुआवजा अवार्ड को पूरी तरह वैधानिक और सही बताया।
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मामले के तथ्यों के अनुसार वर्ष 2015 में केंद्र सरकार ने टकोली क्षेत्र की जमीन को राष्ट्रीय राजमार्ग-21 के चौड़ीकरण और निर्माण के लिए अधिग्रहित करने की अधिसूचना जारी की थी। वर्ष 2016 में अंतिम अधिसूचना के बाद भूमि एनएचएआई के अधिकार में आ गई और 2017 में अधिग्रहण अधिकारी ने प्रारंभिक मुआवजा 4,758 रुपये प्रति वर्ग मीटर तय किया। किसानों ने इस पर असहमति जताई और मामला मध्यस्थ के पास गया। मध्यस्थ ने जून 2024 में भूमि का मूल्य बढ़ाकर 5,126 रुपये प्रति वर्ग मीटर तय किया। साथ ही 2013 के भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत ब्याज और अन्य वैधानिक लाभ देने का आदेश दिया।
इस पर किसान और भूमि मालिकों ने जिला अदालत में याचिका दायर की। किसानों का कहना था कि उनकी जमीन का मूल्य नजदीकी गांव हट्ट की तरह 9,515 प्रति वर्ग मीटर होना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 34 के तहत साक्ष्यों का पुनर्मूल्यांकन करना अदालत के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। केवल गंभीर कानूनी त्रुटि होने पर ही हस्तक्षेप संभव है। न्यायालय ने माना कि मध्यस्थ ने उपलब्ध साक्ष्यों और पूर्व अवार्ड्स का समुचित अध्ययन कर निर्णय लिया है। इसलिए सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए मध्यस्थ के अवार्ड को बरकरार रखा गया। संवाद
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