मंडी। वर्ष 1995 में पनारसा-प्रशर सड़क के लिए अधिगृहीत जमीन के मुआवजे में बढ़ोतरी की मांग वाली याचिका जिला न्यायालय मंडी ने खारिज कर दी। अदालत ने 32 फलदार पेड़ों के लिए तय मुआवजे में हस्तक्षेप से इन्कार करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता 50 पेड़ों और अधिगृहीत जमीन पर दो मंजिला मकान होने का पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं कर सका। भुंतर, कुल्लू निवासी हरि सिंह की एक बीघा नौ बिस्वा जमीन सड़क निर्माण के लिए अधिगृहीत हुई थी। वर्ष 1998 में मूल अवार्ड पारित हुआ, लेकिन फलदार पेड़ों का मुआवजा नहीं दिया गया। बाद में भूमि अधिग्रहण कलेक्टर ने 19 अक्तूबर 2022 को 32 फलदार पेड़ों के लिए 2,91,565 रुपये का अनुपूरक अवार्ड पारित किया।
हरि सिंह ने जमीन पर 47 सेब, दो नाशपाती और एक खुमानी समेत 50 पेड़ होने का दावा करते हुए करीब 1.52 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की थी। इसके अलावा दो मंजिला मकान के लिए 30 लाख, पानी की टंकी के लिए 50 हजार और ब्रेस्ट वॉल के लिए सात लाख रुपये मांगे थे।
अदालत ने कहा कि अनुपूरक अवार्ड के समय याचिकाकर्ता ने स्वयं 32 पेड़ों के मुआवजे की मांग की थी। बागवानी विभाग की रिपोर्ट के आधार पर वर्ष 1995 की दरों से किए गए मूल्यांकन को गलत साबित करने के लिए पर्याप्त विशेषज्ञ साक्ष्य नहीं दिया गया। अधिगृहीत जमीन पर दो मंजिला मकान होने का भी ठोस प्रमाण नहीं मिला। जिला न्यायाधीश पारस डोगर ने याचिका खारिज करते हुए दोनों पक्षों को अपना-अपना खर्च वहन करने के आदेश दिए।