मंडी। जिले के सबसे बड़े अस्पताल मंडी में मरीजों को सोडियम और पोटाशियम लेबल जांचने के लिए निजी लैब में जाना पड़ रहा है। स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह के गृह जिले के सबसे बड़े अस्पताल मंडी में पिछले दो साल से इलेक्ट्रोलाइट मशीन खराब है। जिसे ठीक करने के लिए स्वास्थ्य विभाग कोई पहल नहीं कर रहा है। जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
अस्पताल में दाखिल मरीजों को सोडियम और पोटाशियम का लेबल जांच करवाने के लिए निजी लैबों का रुख करना पड़ रहा है। जोनल अस्पताल मंडी के डाक्टरों की ओर से प्रतिदिन लगभग 15 से 20 मरीजों को सोडियम और पोटाशियम के टेस्ट करवाने को कहा जाता है, लेकिन मंडी अस्पताल की इलेक्ट्रोलाइट मशीन पिछले दो साल से धूल फांक रही है। जिस कारण मरीजों को 100 रुपये से होने वाले टेस्ट के 300 से 400 रुपये निजी लैबों को देने पड़ रहे हैं। हालांकि, अब मंडी अस्पताल को मेडिकल कॉलेज नेरचौक के साथ जोड़ा गया है। जिस कारण अब ओपीडी में मरीजों की संख्या मेें वृद्धि होगी।
अस्पताल प्रबंधन ने जिस कंपनी से मशीन खरीदी है, उस कंपनी को कई बार पत्राचार किया जा चुका है लेकिन पत्राचार के आगे कोई काम नहीं हो रहा है। इससे मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जिले के ज्यादातर लोग क्षेत्रीय अस्पताल पर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए निर्भर हैं। लेकिन, यहां लोगों को सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।