मंडी। बरसात के दिनों में जलजनित रोगों से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। जलजनित रोगों की चपेट में अधिकतर बच्चे ही आते हैं। पीलिया, डायरिया सहित अन्य जलजनित रोगों के प्रति सजगता बरतने के लिए सभी सीएचसी और पीएचसी को निर्देश जारी कर दिए हैं। बच्चों के डायरिया पाड़ित होने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। जिसे देखते हुए विभाग ने बच्चों में डायरिया पाए जाने पर सीएचसी और पीएचसी को इसे गंभीरता से लेने के निर्देश जारी किए हैं।
जिला में वर्तमान में चार सिविल अस्पताल, 11 सीएससी और 73 पीएचसी चल रहे हैं। सभी अस्पतालों में ओआरएस और जिंक कार्नर स्थापित किए जाएंगे। सिविल और क्षेत्रीय अस्पताल में इन कार्नरों को शिशु वार्ड के नजदीक स्थापित किया जाएगा। वहीं, सीएचसी और पीएचसी में इस तरह का कार्नर स्थापित किया जाएगा। यहां पर बच्चों को ओआरएस का घोल पिलाया जाएगा। साथ ही जिंक टेबलेट भी दिए जाएंगे। इसके अलावा बच्चों के अभिभावकों को ओआरएस और जिंक के बारे में भी बताया जाएगा।
बरसात के मौसम में 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों में डायरिया फैलने का खतरा रहता है। डायरिया सावधानी नहीं बरतने पर जानलेवा भी साबित हो सकता है। बच्चों को डायरिया से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग निशुल्क ओआरएस के पैकेट वितरित करेगा। इसके लिए स्वास्थ्य कर्मी और आशा वर्कर को जिम्मेवारी सौंपी गई है। आशा वर्कर और स्वास्थ्य कर्मी घर-घर जाकर ओआरएस के पैकेट बांटेंगे।
कोट्स
क्षेत्रीय अस्पताल और सिविल अस्पताल के साथ ही सीएचसी और पीएचसी में ओरआरएस एवं जिंक कार्नर स्थापित किए जाएंगे। स्वास्थ्य कर्मचारी और आशा वर्कर घर-घर जाकर ओआरएस पैकेट व जिंक टेबलेट बांटेंगे। इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
..डॉ. देशराज शर्मा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, क्षेत्रीय अस्पताल मंडी