फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mandi News: पत्नी और बच्चों को साझा घर में दो कमरे, रसोई और शौचालय देने के आदेश

विज्ञापन
विज्ञापन
मंडी। घरेलू हिंसा के मामले में अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय सुंदरनगर ने पति की अपील खारिज कर दी। अदालत ने निचली अदालत के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसके तहत पत्नी और तीन बच्चों को साझा घर में रहने के लिए दो कमरे तथा रसोई, शौचालय और स्नानघर इस्तेमाल करने का अधिकार दिया गया था। साथ ही तीनों बच्चों के लिए 1500-1500 रुपये यानी कुल 4500 रुपये प्रतिमाह देने का आदेश भी कायम रखा गया।
विज्ञापन

अमर सिंह ने न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी कोर्ट नंबर-दो सुंदरनगर की ओर से एक फरवरी 2025 को दिए आदेश को चुनौती दी थी। निचली अदालत ने घरेलू घटना रिपोर्ट की तारीख से तीनों बच्चों के लिए 1500-1500 रुपये प्रतिमाह देने के अलावा पत्नी और बच्चों को साझा घर से बेदखल करने या उनके कब्जे में किसी तरह का हस्तक्षेप करने पर रोक लगाई थी। पत्नी को आवास उपलब्ध कराने के बजाय 3000 रुपये प्रतिमाह देने का वैकल्पिक प्रावधान भी किया गया था।
अपील में पति ने दलील दी कि उसकी कोई स्थायी आय नहीं है। वह मनरेगा में आकस्मिक मजदूरी करता है और वृद्ध मां की जिम्मेदारी भी उसी पर है। उसने यह भी कहा कि पत्नी बैंक में काम कर रही है और खुद कमाती है। अदालत ने इन आधारों को निचली अदालत के आदेश में हस्तक्षेप के लिए पर्याप्त नहीं माना।
विज्ञापन

अदालत ने जजमेंट में कहा कि पति ने अपनी जिरह में पांच कमरों का मकान होने की बात स्वीकार की है। ऐसे में वह पत्नी और बच्चों के लिए उपयुक्त अलग आवास उपलब्ध करा सकता है। अदालत ने यह भी कहा कि बच्चों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से केवल आय का हवाला देकर बचा नहीं जा सकता। मनरेगा में काम करने की बात उसके कमाने में सक्षम होने को भी दर्शाती है। तीन बच्चों के लिए 4500 रुपये की आर्थिक सहायता को अदालत ने उचित माना। वहीं, पत्नी को खुद के भरण-पोषण के लिए आर्थिक सहायता नहीं देने के निचली अदालत के फैसले को उसने चुनौती नहीं दी थी। इसलिए इस हिस्से का फैसला अंतिम हो चुका है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें