कमरूनाग मंदिर परिसर की झील में अर्पित किए नोट, सिक्के व अन्य गहने। संवाद
गोहर (मंडी)। श्रद्धा, आस्था और परंपरा का प्रतीक बड़ादेव कमरुनाग का ऐतिहासिक तीन दिवसीय सरानाहुली मेला सोमवार को संपन्न हो गया। तीन दिन तक कमरुघाटी में भक्ति और उत्साह का माहौल बना रहा। आषाढ़ संक्रांति के पावन अवसर पर आयोजित इस भव्य मेले में करीब डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालुओं और पर्यटकों ने देव कमरुनाग के दरबार में शीश नवाकर आशीर्वाद प्राप्त किया।
मेले में मेहमान देवताओं के रूप में शामिल देव शिल्ही लटोगली और पंचवीर भलोठी सोमवार को अपने-अपने देवालयाें के लिए रवाना हो गए। देव कमरुनाग के गूर देवी सिंह ने बताया कि सरानाहुली मेला परंपरागत तरीके से शांतिपूर्वक संपन्न हुआ। इसमें देव परंपरा और रीति-रिवाजों का पूर्ण पालन किया गया।
श्रद्धालुओं की भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने व्यापक प्रबंध किए थे। मेला स्थल पर पुलिस, होमगार्ड और वन विभाग के कर्मचारी तीन दिन तक तैनात रहे। यातायात व्यवस्था को भी सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष रूट प्लान तैयार किया गया था, जिससे किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो। इस बार मेले में पर्यावरण संरक्षण को लेकर विशेष पहल की गई। नाचन वन मंडल की ओर से जालपा माता मंदिर से लेकर कमरुनाग मंदिर तक ईको-फ्रेंडली डस्टबिन लगाए गए। श्रद्धालुओं से अपील की गई कि प्लास्टिक का उपयोग न करें और कूड़ा निर्धारित स्थानों पर ही डालें। इसके अलावा मंदिर कमेटी और स्वयंसेवकों ने सफाई व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग दिया। स्थानीय उत्पादों को भी इस मेले के माध्यम से बाजार मिला।
मेले के समापन अवसर पर स्थानीय लोगों और देव परंपरा से जुड़े प्रतिनिधियों ने आने वाली पीढ़ियों को देव संस्कृति से जोड़ने और इसके संरक्षण का संकल्प लिया। साथ ही भविष्य में मेले को और व्यवस्थित और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में काम करने का निर्णय लिया गया। डीएसपी दिनेश कुमार ने बताया कि मेला शांतिपूर्वक संपन्न हो गया है। संवाद